महालक्ष्मी कृपा प्रार्थना स्तोत्र जो स्वयं इंद्रदेव द्वारा रचित है, जानिए इसकी कथा और महिमा
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मां महालक्ष्मी अपार धन संपदा देने वाली हैं। ये ऐश्वर्यों की अधिष्ठात्री देवी हैं, इनकी कपा से रंक को भी राजा बनने में समय नहीं लगता है, लेकिन जिससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं वह कुछ ही समय में दरिद्र हो जाता है। मां महालक्ष्मी ऐश्वर्य, वैभव, सौभाग्य, और असीम संपदा देने वाली हैं। इसलिए मां महालक्ष्मी की नित्य आराधना करनी चाहिए, “महालक्ष्मी कृपा प्रार्थना स्तोत्र” को स्वयं भगवान इंद्र द्वार रचित माना गया है इस स्तोत्र में इंद्रदेव के द्वारा मां की बहुत सुंदर आराधना कि गई है। इसे महालक्ष्म्यष्टक स्तोत्र भी कहा जाता है। जानते हैं इसकी पौराणिक कथा और इसका पाठ करने की महिमा...
यह देखकर दुर्वासा बहुत क्रोधित हुए उन्होंने इसे अपमान समझा और देवराज इन्द्र को शाप दिया कि हे 'इन्द्र' ऐश्वर्य के अहंकार में आकर तुमने मेरी दी हुई इस माला का निरादर किया है। यह केवल एक माला नहीं बल्कि लक्ष्मी का धाम थी। इसलिए तुम्हारे अधिकार में जो भी तीनों लोकों की लक्ष्मी है, वह शीघ्र ही अदृश्य हो जाएगी। दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण तीनों लोक श्रीहीन हो गए और इन्द्र की राज्यलक्ष्मी समुद्र में चली गई। तब सभी देवताओं ने लक्ष्मी जी से प्रार्थना की जिससे महालक्ष्मी प्रकट हुई, तब देवराज इंद्र ने मां लक्ष्मी की स्तुति की जिसे महालक्ष्मी रक्षा स्तोत्र कहा जाता है।
महालक्ष्मी रक्षा स्तोत्र के पाठ की महिमा
जो व्यक्ति महालक्ष्मी रक्षा स्तोत्र का पाठ लीन होकर सच्ची श्रद्धा के साथ हमेशा करता है, उसे हर तरह से सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि जो प्रतिदिन एक समय इसका पाठ करता है, उसके सभी पापकर्म नष्ट होते हैं और जो मनुष्य दो समय इसका पाठ करता है, उसे धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। जो मनुष्य तीनों समय इस स्तोत्र का पाठ करता है, मां महालक्ष्मी की कपा उस पर सदैव बनी रहती है।