{"_id":"63e4cd3229e646b54c0a361d","slug":"kundali-me-videsh-yatra-ke-yog-when-people-go-to-foreign-according-to-kundli-or-horoscope-2023-02-09","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Videsh Yatra Yoga: विदेश गमन में कौन सी राशि और नक्षत्र बनते हैं सहायक, अष्टम भाव महत्वपूर्ण क्यों? समझिए","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
Videsh Yatra Yoga: विदेश गमन में कौन सी राशि और नक्षत्र बनते हैं सहायक, अष्टम भाव महत्वपूर्ण क्यों? समझिए
Thu, 09 Feb 2023 05:11 PM IST
आशिकी पटेल
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Thu, 09 Feb 2023 05:11 PM IST
सार
Kundali me Videsh Yatra ke Yog: मेष, कर्क, तुला और मकर राशि चर राशि है। यानी कि इस राशि के लोग सदैव चलायमान रहना पसंद करते हैं। इसमें भी कर्क और मकर की भूमिका विदेश गमन में सहायक है। मिथुन, कन्या, धनु और मीन द्विस्वभाव राशि है यानी कि कभी मन हुआ तो गए और कभी मन नहीं हुआ तो नहीं गए।
विज्ञापन
कुंडली में कब बनते हैं विदेश यात्रा के योग
- फोटो : iStock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Videsh Yatra Yoga: आज विदेश जाने की इच्छा लगभग हर किसी को होती है। कोई पढ़ाई करने के लिए विदेश जाना चाहता है तो कोई कारोबार के लिए जाना पसंद करता है।पहले के जमाने में लोग समुद्र से यात्रा करते थे, इसलिए कर्क मीन वृश्चिक राशि और चंद्रमा की भूमिका होती थी लेकिन आज के समय में हवाई यात्रा भी होने लगी है। ऐसे में बाकी राशियों की चर्चा भी होनी ज़रूरी है। आइये समझे की विदेश गमन योग कैसे बनता है।
विज्ञापन
मेष, कर्क, तुला और मकर राशि चर राशि है। यानी कि इस राशि के लोग सदैव चलायमान रहना पसंद करते हैं। इसमें भी कर्क और मकर की भूमिका विदेश गमन में सहायक है। मिथुन, कन्या, धनु और मीन द्विस्वभाव राशि है यानी कि कभी मन हुआ तो गए और कभी मन नहीं हुआ तो नहीं गए। इसमें भी धनु और मीन विदेश यात्रा करवाने वाली होती है। वृष, सिंह, वृश्चिक और कुम्भ स्थिर राशि है यानी कि ऐसे लोग काफी हद तक स्थान नहीं बदलते है लेकिन इनमे भी केवल वृश्चिक राशि ऐसी है जो विदेश जाने के लिए योग बनाती है, क्योंकि यह काल पुरुष की कुंडली के आठवें भाव की राशि है जो कि समुद्री यात्रा को दर्शाती है।
विज्ञापन
अब राशि की बात करने के बाद हम नक्षत्र के बारे में आपको बताते हैं। पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद ये तीन शनि के नक्षत्र हैं जो कि विदेश जाने में भूमिका अदा करते हैं। इसके अलावा आद्रा, विशाखा, पुनर्वसु, रोहिणी और श्रवण नक्षत्र भी जातक के मन को विदेश जाने के लिए प्रेरित करते हैं। किसी जातक की विदेश यात्रा कब होगी इसके लिए तीसरे, सातवें और बारहवें भाव का विश्लेषण जरूरी है लेकिन सबसे अधिक आवश्यक अष्टम भाव है। दरअसल, विदेश घूमने या विदेश में बस जाने के पीछे इस भाव की भूमिका सबसे अधिक होती है। जब हम नवम और द्वादश को देखते है तो यह नहीं भूलना चाहिए की यह भाव नवम से द्वादश और द्वादश से नवम है, इसलिए बिना इस भाव के सहयोग के कोई भी विदेश में चैन और सुकून से नहीं रह सकता है।
विज्ञापन
दूसरी ओर वृश्चिक राशि भी इसी भाव को दर्शाती है जिसकी सहायता से जातक समुद्री यात्रा करता है। समुद्री यात्रा का कारक अष्टम भाव है वहीं नवम भाव दूर जाने के लिए प्रेरित करता है। द्वादश भाव अलगाव का भाव है इसलिए इस भाव के प्रबल होने पर जातक कितना ही धनी क्यों नहीं हो वह एक दिन घर परिवार दुकान मकान सब छोड़कर बहुत दूर चला जाता है।
अगर चौथे और चौथे भाव के स्वामी का जुड़ाव विदेश गमन के योग से हो तो जातक विदेश जाकर अपना काम करता है और परिवार से अलग नहीं होता लेकिन अगर लग्नेश का संबंध नवम और द्वादश के साथ हो तो जातक विदेश में ही बस जाता है। आठवें, नवे और बारहवे भाव का परिवर्तन या आपस में सम्बन्ध विदेश जाने के प्रबल योग बनाता है। अगर दशम और छठे भाव के स्वामी द्वादश में बलवान हो तो जातक विदेश में नौकरी करता है लेकिन पाप प्रभाव में हो जातक विदेश में कष्ट भोगता है।
विदेश में सफल होने के लिए शनि, राहु और मंगल का बलवान होना बेहद ज़रूरी है। अगर लग्नेश और सप्तम के स्वामी द्वादश में हो और गुरु भी वहीं हो तो ऐसी स्त्री अपने पति के साथ विदेश चली जाती है। अगर पंचम की दृष्टि आ रही तो विदेश जाकर पढाई करती है और वहीं प्रेम विवाह भी करती है। अगर नवम भाव में गुरु या शनि हो और नवम का स्वामी सप्तम के स्वामी के साथ बारहवें भाव में हो तो ऐसा जातक धर्म के प्रचार के लिए विदेश रहता है।