Kundali: जन्म कुंडली के योग बनाते हैं आपको संपन्न और करते हैं सुख-समृद्धि प्रदान
जन्म कुंडली में ग्रहों की दशा, उसकी स्थिति, ग्रहों पर शुभ और पाप ग्रहों की दृष्टि के अनुसार की योगों का निर्माण होता है उन्हीं में से एक है संपन्नता का योग। जिन लोगों की कुंडली में ये योग होते हैं उन्हें अपने जीवन में सभी सुख-सुविधाएं मिलती हैं। आइए जानते हैं इन योगों के बारे में-
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कुंडली एक ज्योतिषीय चार्ट है जिसका उपयोग ज्योतिषविदों द्वारा किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवन में अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए किया जाता है। किसी व्यक्ति की कुंडली उसके जन्म के समय विभिन्न ग्रहों की सटीक स्थिति को दर्शाती है। ज्योतिषी जन्म कुंडली को एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज मानते हैं जो उन्हें अपने जीवनकाल में किसी व्यक्ति द्वारा सामना की गई विभिन्न घटनाओं को समझने और समझाने में मदद करता है। हिन्दू धर्म में कुंडली का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद सबसे पहले बच्चे के जन्म के समय के साथ उसकी कुंडली बनवाई जाती है, जो उसके जीवन के लिए सबसे महत्पूर्ण होती है | मान्यता के अनुसार, किसी व्यक्ति का भाग्य उसके जन्म से पूर्व ही निर्धारित हो जाता है और जन्म के पश्चात यह भाग्य कुंडली के रूप में जन्मपत्री के साथ जुड़ जाता है | इसलिए अधिकतर लोग अपने बच्चे के जन्म के समय ही किसी ज्योतिष के पास जाकर कुंडली बनवाते है। जन्म कुंडली में ग्रहों की दशा, स्थिति, उन पर शुभ और पाप ग्रहों की दृष्टि के अनुसार की योगों का निर्माण होता है उन्हीं में से एक है संपन्न होने के योग। जिन लोगों की कुंडली में ये योग होते हैं उन्हें अपने जीवन में सभी सुख-सुविधाएं मिलती हैं। आइए जानते हैं इन योगों के बारे में-
कुंडली के ये भाव दिलाएंगे आपको सुख समृद्धि
- कुंडली के पंचम स्थान में गुरु की राशि धनु या मीन हो, उसमें गुरु स्थित हो और लाभ भाव में चंद्र के साथ बुध युति करे तो व्यक्ति बहुत धन का स्वामी होता है।
- यदि किसी जातक की कुंडली में पंचम स्थान में कर्क राशि में चंद्र हो, लाभ भाव में मंगल हो तो उसके पास धन संपत्ति की कोई कमी नहीं होती है।
- यदि किसी जातक की कुंडली में सिंह लग्न हो और उसमें सूर्य विराजित हो । इसके साथ ही उस पर मंगल व गुरु की दृष्टि हो तो वह व्यक्ति कभी न समाप्त होने वाली संपत्ति का स्वामी होता है।
- यदि किसी जातक की कुंडली के लग्न भाव में कर्क राशि हो, उसमें स्थित चंद्र, गुरु और मंगल से की दृष्टि हो तो व्यक्ति धन और यश अर्जित करता है।
- यदि किसी जातक की कुंडली में वृश्चिक या मेष राशि लग्न भाव में स्थित हो, और उसमें मंगल के साथ गुरु-चंद्र हो या इनकी दृष्टि हो तो व्यक्ति समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करता हैं।
- यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में लग्न भाव में मिथुन या कन्या राशि हो और उसमें बुध ग्रह विराजित हो और उस पर गुरु-चंद्र की दृष्टि हो वह धन के मामले में भाग्यशाली होता है।
- यदि प्रथम भाव से भाग्य स्थान में गुरु ग्रह धनु या मीन राशि में और साथ ही उसमें शुक्र ग्रह भी विराजित हों तो गुरु-शुक्र की युति व्यक्ति को धनवान बनता है।
- यदि पंचम स्थान में बुध की राशि कन्या या मिथुन स्थित हो और उसमें शुभ ग्रह विराजित हो और साथ ही आपके लाभ स्थान में चंद्र के साथ मंगल हो तो व्यक्ति बहुत धनवान होता है।
- यदि पंचम स्थान में शुक्र की राशि में वृषभ या तुला स्थित हो और उसमें शुक्र व बुध हो तथा एकादश स्थान में शनि हो तो व्यक्ति के पास अटूट संपत्ति होती है।
- पंचम भाव में सिंह राशि में सूर्य स्थिति हो और गुरु आपके लाभ भाव में स्थित है तो व्यक्ति के पास धन होता है।
- पंचम भाव में शनि की राशि कुंभ या मकर हो, उसमें लाभेश युक्त शनि भी हो तो व्यक्ति अकूत धन-संपत्ति का स्वामी होता है।