{"_id":"5e09ca288ebc3e880968fd30","slug":"importance-of-tithi-in-panchang","type":"story","status":"publish","title_hn":"ज्योतिष: तिथियों के अनुसार कार्य शुरू करके संवारे अपना भाग्य","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
ज्योतिष: तिथियों के अनुसार कार्य शुरू करके संवारे अपना भाग्य
Tue, 31 Dec 2019 07:48 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 31 Dec 2019 07:48 AM IST
विज्ञापन
rikta tithi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्योतिष विज्ञान के मुहूर्त शास्त्र में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का महत्व सर्वोपरि रहता है। इन्ही पांचों के संयोग को पंचांग कहते हैं। तिथियों की पांच संज्ञा होती है इनमे नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा। इनमे भी चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी तिथि को रिक्तातिथि की संज्ञा दी गयी है। इनके गुण-दोषभी इन्हीं के नामों के अनुसार घटित होते हैं।
विज्ञापन
नन्दा तिथि में किसी भी तरह के फिल्म उद्योग, फैशन शो, भारी उद्योग की स्थापना करना, हीरे जवारात का व्यापार करना, विलासिता एवं मनोरंजन से सम्बंधित कार्य सभी कार्य आरंभ करना श्रेयष्कर रहता है।
विज्ञापन
भद्रा तिथि में से स्वास्थ्य, शिक्षा-प्रतियोगिता में सफलता व्यवसाय की शुरुआत उग्र कार्य करना बेहतर रहता है। जयातिथि भी प्रशासनिक विभागों के साथ-साथ, न्यायिक विभाग, किसी भी तरह की शिक्षा प्रतियोगिता में शामिल होने विद्या आरंभ करने, परदेश गमन, संकल्प सिद्धि और मुकदमेबाजी के लिए सर्वोत्तम मानी गयी है।
विज्ञापन
रिक्ता तिथि आपरेशन, दुश्मनों के खात्मा और कर्ज से छुटकारा दिलाने के सबसे उत्तम माना गया है। इसी प्रकार पूर्णातिथि किये गए सभी संकल्पों एवं कार्यों को पूर्ण करने के लिए शुभ फलदायी होती है। इन पाँचों में रिक्ता का विचार सर्वाधिक किया जाता है क्योंकि रिक्ता तिथि एकांत, शान्ति, सूनेपन और त्याग का कारक है। रिक्ता तिथि में जन्म लेनेवाला जातक दूसरों के लिए समर्पित होता है उसका जीवन स्वयं के लिए नहीं समाज के लिए होता है। ऐसे व्यक्तियों में अधिकतर लोग साधु-सन्यासी होते हैं।
रिक्ता तिथियों में क्रमशः चतुर्थी के स्वामी गणेश, नवमी की शक्ति और चतुर्दशी के शिव हैं। फलित ज्योतिषग्रंथ मानसागरी के अनुसार 'रिक्ता तिथौ वितर्कज्ञः प्रमादी गुरु निन्दकः । शास्त्रज्ञो मदहन्ता कामुकश्च नरो भवेत् ।।
इस तिथि में जन्म लेने वाला जातक हर एक कार्य में अनुमान करने वाला, गुरुओं का निन्दक, शास्त्रों को जानने वाला, दूसरे के अहंकार का नाश करने वाला एवं अत्यधिक कामी होता है। कार्य व्यापार आरम्भ करते समय अथवा किसी भी मुहूर्त का विचार करते समय रिक्ता तिथि का त्याग किया जाता है। इसमें आरम्भ किये गए कार्य निष्फल होते हैं किन्तु विशेष ग्रह-नक्षत्र का संयोग होने पर इसमें भी शुभफल देने की शक्ति आ जाती है, जैसे जिस दिन यह तिथि पड़ रही हो उस दिन शनिवार हो तो 'शनि रिक्ता समायोगे सिद्धयोगः वर्तते' इससे बनने वाले योग सभी दुष्प्रभावों को नष्ट करके सिद्धि प्रदान करते हैं।
इसी प्रकार नन्दा को शुक्रवार, भद्रा को बुधवार, जया को मंगलवार, रिक्ता को शनिवार तथा पूर्णा को गुरुवार हो तो वह तिथि “सिद्धा”कहलाती है। इसी प्रकार रिक्ता तिथि को यदि गुरूवार हो यह संयोग तो बेहद कष्टकारी योग होता है, इसके अंतर्गत किये अधिकतर कार्य-व्यापर में हानि तो होती ही है बल्कि अधिकतर मामलों में विफलता ही मिलती है।
चैत्रमास में दोनों पक्ष की रिक्ता तिथि नवमी, ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, कार्तिक मास में शुक्लपक्ष की चतुर्दशी, पौषमास में दोनों पक्षों की चतुर्थी, फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि मास शून्य तिथियां होती हैं। इन तिथियों शुभ काम नहीं करना चाहिए । यदि किसी भी तरह का शुभकार्य आरम्भ कर रहे हों तो रिक्ता तिथि का और इससे बनने वाले योगों का विचार करना अति आवश्यक है ।