फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Astrology ›   diwali 2020 before diwali auspicious coincidence of pushya nakshatra good for start new work and shopping

Diwali 2020: दिवाली से पहले 7 और 8 नवंबर को पुष्य नक्षत्र का अद्भुत संयोग, खरीदारी और शुभ कार्यो के लिए अच्छा मौका

Sat, 07 Nov 2020 08:52 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 07 Nov 2020 08:52 AM IST
सार

  • ज्योतिष शास्त्र में सभी सत्ताईस नक्षत्रों में 'पुष्य' नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, यद्यपि अभिजीत मुहूर्त को नारायण के 'चक्रसुदर्शन' के समान शक्तिशाली बताया गया है फिर भी इस नक्षत्र के संयोग से बनने वाले शुभ योगों का प्रभाव अन्य योगों की तुलना में श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यह नक्षत्र सभी अरिष्टों का नाशक और सर्व दिग्गामी है।

विज्ञापन
diwali 2020 before diwali auspicious coincidence of pushya nakshatra good for start new work and shopping
pushya nakshatra 2020: मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार दिन-रात्रि के मध्य 30 मुहूर्त होते हैं जिनमें कई मुहूर्त ऐसे भी रहते हैं जिसमें कोई भी आवश्यक कार्य संपन्न किया जा सकता है

विस्तार

सभी कार्यों में संकल्पसिद्धि कराने वाला अजेय 'रवियोग' तथा 'रविपुष्य' योग एकसाथ क्रमशः 07 नवंबर शनिवार की सुबह 08 बजकर 03 मिनट से आरंभ होकर रविवार को सुबह 08 बजकर 43 तक रहेगा। शनिदेव का 'पुष्य नक्षत्र' शनिवार को मिलने के फलस्वरूप शनिवार को 'रवियोग' तथा रविवार को भी 'पुष्य' नक्षत्र रहने से रविवार को महान 'रविपुष्य' योग का निर्माण हो रहा है जो रविवार 08 नवंबर को सुबह 08 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।

विज्ञापन


मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार दिन-रात्रि के मध्य 30 मुहूर्त होते हैं जिनमें कई मुहूर्त ऐसे भी रहते हैं जिसमें कोई भी आवश्यक कार्य संपन्न किया जा सकता है किंतु, वार और नक्षत्र के संयोग से भी कई ऐसे अतिशुभ योग बनते हैं जिनमें कोई भी बड़े से बड़ा कार्य आरंभ करके, नए अनुबंधों पर हस्ताक्षर करके, मंत्र अनुष्ठान, औषधीय कार्य, आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करके तथा जमीन-जायदाद आदि का क्रय करके सभी मनोरथ सिद्ध किये जा सकते हैं।
विज्ञापन


इन योगों में रवियोग, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग, गुरुपुष्य योग, द्विपुष्कर-त्रिपुष्कर योग के साथ-साथ सभी कुयोगों की अशुभता समाप्त करने वाला 'रविपुष्य' योग प्रमुख है। ज्योतिष शास्त्र में सभी सत्ताईस नक्षत्रों में 'पुष्य' नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, यद्यपि अभिजीत मुहूर्त को नारायण के 'चक्रसुदर्शन' के समान शक्तिशाली बताया गया है फिर भी इस नक्षत्र के संयोग से बनने वाले शुभ योगों का प्रभाव अन्य योगों की तुलना में श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यह नक्षत्र सभी अरिष्टों का नाशक और सर्व दिग्गामी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुराणों तथा ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मा जातक महान कर्म करने वाला, बलवान, कृपालु, धार्मिक, धनी, विविध कलाओं का ज्ञाता, दयालु और सत्यवादी होता है ।महिलाओं के लिए ये इस नक्षत्र को और भी प्रभावशाली माना गया है ।इनमें जन्मी कन्याएं अपने कुल-खानदान का यश चारों दिशाओं में फैलाती हैं और कई महिलाओं को तो महान तपश्विनी की संज्ञा मिली है जैसा कि कहा भी गया है कि- देवधर्म धनैर्युक्तः पुत्रयुक्तो विचक्षणः ।पुष्ये च जायते लोकः शांतात्मा शुभगः सुखी ।अर्थात- जिस कन्या की उतपत्ति पुष्य नक्षत्र में होती है वह शौभाग्य शालिनी, धर्म में रूचिरखने वाली, धन-धान्य एवं पुत्रों से युक्त सौन्दर्य शालिनी तथा पतिव्रता होती है।वैसे तो यह नक्षत्र हर सत्ताईसवें दिन आता है किन्तु हर बार रविवार ही हो ये तो संभव नही हैं ।इसलिए इस नक्षत्र के दिन गुरु एवं सूर्य की होरा में भी कार्य आरंभ करके गुरुपुष्य और रविपुष्य जैसा परिणाम प्राप्त किया जा सकता हैं |

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed