{"_id":"5e7b2ae88ebc3e768258b3b7","slug":"coronavirus-astrology-predictions-india-will-get-help-in-fighting-corona-virus","type":"story","status":"publish","title_hn":"Coronavirus And Astrology: इस ज्योतिष गणना के आधार पर भारत को कोरोना से लड़ने में मिलेगी मदद","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
Coronavirus And Astrology: इस ज्योतिष गणना के आधार पर भारत को कोरोना से लड़ने में मिलेगी मदद
Thu, 26 Mar 2020 12:47 PM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 26 Mar 2020 12:47 PM IST
विज्ञापन
कोरोना वायरस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीवोत्पत्ति के कारक शुक्र 28 मार्च को दोपहर बाद 3 बजकर 36 मिनट पर मेष राशि की यात्रा समाप्त करके अपनी स्वगृही राशि वृषभ में प्रवेश कर रहे हैं। अपनी राशि बृषभ में शुक्र 4 माह 3 तक की लंबी अवधि तक विद्यमान रहेंगे। इस राशि पर गोचर करते समय ये 13 मई को बक्री होंगे और पुनः 25 जून को मार्गी होकर 1 अगस्त की सुबह मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।
विज्ञापन
वक्री-मार्गी अवस्था में इतनी अवधि तक अपने घर में शुक्र का गोचर करते रहना भारतवर्ष की जन्मकुंडली के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब जबकि पूरा देश करोना वायरस के खौफ से कर्फ्यू से गुजर रहा है ऐसे में स्वतंत्र भारत की प्रभाव लग्न 'वृषभ' में इनका आना भारत वासियों के लिए राहत की खबर है।
विज्ञापन
सृष्टि में शुक्र को जीवाश्म का कारक माना जाता है। वह जीवाश्म चाहे अणु से भी छोटा हो या बड़े से बड़ा ही क्यों न हो। तरह तरह के वायरस में भी शुक्र के ही प्रभाव देखे जाते हैं। स्वतंत्र भारत की जन्म लग्न वृषभ में शुक्र का आना और मालव्य जैसे योगों का निर्माण करना देश के लिए अच्छा संकेत है।
विज्ञापन
भारत की प्रभाव राशि कर्क से लाभस्थान में इनका गोचर करना भी भारत को अति आर्थिक क्षति ना होने पाए इसे रोकने में मदद करेगा। यदि देश की जनता केंद्र सरकार के बताए गए नियमों का पालन करती है तो अति शीघ्र भारतवर्ष में बढ़ रहे कोरोना जैसे महामारी के मरीजों पर विराम लग जाएगा और हम इस महामारी पर विजय प्राप्त करेंगे।
फलित ज्योतिष में इन्हें सृष्टि में सृष्टि सृजन का कारक माना गया है ये श्वेत वर्ण गुर्दा,कफ,वीर्य,नेत्र, सौन्दर्य विषयवासना, निःस्वार्थ प्रेम, कामेक्षा सांसारिक सुख आकर्षण, विलासिता पूर्ण वस्तुओं को प्रभावित करने वाले सफ़ेद वस्तुओं तथा प्राणियों के शरीर में गुप्तागों आदि के अधिपति माने गए हैं। कवि, संगीतज्ञ चित्रकार, अभिनेता आदि इन्हीं के आशीर्वाद से कामयाबी पाते हैं। भरणी, पूर्वाफाल्गुनी एवं पूर्वाषाढा नक्षत्र के स्वामी शुक्र बृषभ एवं तुला राशि के भी स्वामी हैं, ये कन्या राशि में नीच एवं मीन राशि में उच्च संज्ञक माने गए हैं। इन्हें सर्वाधिक जीवाश्म का कारक माना
जाता है वह जीवाश्म चाहे अणु से भी छोटा हो या बड़े से बड़ा ही क्यों न हो। तरह तरह के वायरस में भी शुक्र के ही प्रभाव देखे जाते हैं।
जैसा पहले बताया जा चुका है कि स्वतंत्र भारत की जन्मलग्न कुंडली में अपनी ही राशि वृषभ में शुक्र का आना और मालव्य जैसे योगों का निर्माण करना देश के लिए अच्छा संकेत है। शुक्र अकेले ही स्टॉक मार्केट को संभालने के लिए पर्याप्त हैं इसने द्वारा प्रभावित सेक्टर्स, कोरोना के द्वारा हो रहे आर्थिक नुकसान से शीघ्र ही उबर जायेंगे क्योंकि इनका गोचरकाल चार माह तक रहेगा। स्वतंत्र भारत की प्रभाव राशि कर्क से वर्तमान समय में ये लाभस्थान में गोचर करेंगे जिसके फलस्वरूप भारत को अति आर्थिक क्षति ना होने पाए इसे रोकने में मदद करेगा।
इस गोचरकाल का सबसे सुखद पहलू यह है कि यदि देश की जनता केंद्र सरकार के बताए गए नियमों का पालन करती है। लोगों से दूरियां बनाकर रखती है और अपने घर में ही विश्राम करती है तो अतिशीघ्र ही भारतवर्ष में बढ़ रहे कोरोना जैसी महामारी पर विराम लगेगा और हम सभी इसे परास्त करने के कामयाब होंगे। इसके द्वारा संकर्मित होते जा रहे भारी संख्या में बढ़ रहे मरीजों पर भी विराम लग जाएगा और हम इस महामारी पर विजय प्राप्त करेंगे। फलित ज्योतिष में शुक्र का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण माना गया है इसलिए हमें हाताश नहीं होते हुए इनके आराध्यदेव श्री शिव का पंचाक्षर मन्त्र ॐ नमः शिवाय का जाप घर बैठकर ही करते रहना चाहिए इसी में सभी का कल्याण है।