देवप्रयाग। भगवान श्रीराम की तपस्थली और पावन संगम तीर्थ देवप्रयाग में पितृ पक्ष के अवसर पर महाराज दशरथ के तर्पण एवं पिंडदान की पौराणिक परंपरा श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ निभाई गई। केदारखंड के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए इसी पवित्र स्थान पर तर्पण किया था। इसी सनातन परंपरा का निर्वहन करते हुए प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर परिसर में विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया। मंदिर परिसर स्थित छतरी स्थल पर पुजारी समीर पंचपुरी द्वारा महाराज दशरथ को जल तर्पण अर्पित किया गया, जबकि पुरोहित अनूप थपलियाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत श्राद्ध और पूजन संपन्न कराया। केदारखंड ग्रंथ में उल्लेख मिलता है कि देवप्रयाग आगमन के दौरान जब श्रीराम ने अपने पिता का पिंडदान किया था। तब स्वयं राजा दशरथ ने प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होकर पुत्र के हाथों से पिंड ग्रहण किया था। सनातन मान्यता में गंगा के मुख्य उद्गम स्थल देवप्रयाग को पितरों की मुक्ति और अक्षय तृप्ति के लिए श्रेष्ठतम तीर्थ माना गया है। भगवान राम के तप से पवित्र इस भूमि में आज भी महाराज दशरथ की स्मृतियां जीवंत हैं। यहाँ स्थित दशरथानांचल पर्वत सहित कई अन्य प्राचीन स्थल इस बात के पौराणिक साक्षी हैं कि प्रभु श्रीराम का इस पावन नगरी से अत्यंत गहरा संबंध रहा है।