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आरएच असंगति से जूझ रहे नवजात को बेस अस्पताल के डॉक्टरों ने दिया नया जीवन

Alka Tyagi Updated Tue, 01 Sep 2026 06:42 PM IST

मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल श्रीनगर के बाल रोग विभाग की चिकित्सकीय टीम ने समय पर उपचार और लगातार निगरानी के दम पर नवजात को नया जीवन देने में सफलता हासिल की। जन्म के बाद तेजी से बढ़ता पीलिया, शरीर में टूटती रक्त कोशिकाएं और गंभीर रक्त संक्रमण से जूझ रहे शिशु का गंभीर स्थिति में दो बार रक्त बदलना (एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन) पड़ा, जबकि उसे आईवीआईजी नामक महंगी दवा भी दो बार दी गई। हालत बिगड़ने पर दो बार कृत्रिम सांस देने वाली मशीन पर रखने के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ होने पर नवजात को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई । श्रीकोट श्रीनगर निवासी गिरीश पुरोहित की पत्नी करिश्मा ने 16 अगस्त को बेस अस्पताल श्रीनगर में नवजात शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद जांच में सामने आया कि मां का रक्त समूह आरएच निगेटिव, जबकि बच्चे का रक्त समूह आरएच पॉजिटिव था। दोनों के रक्त समूह में असंगति के कारण नवजात के शरीर में रक्त की लाल कोशिकाएं तेजी से टूटने लगीं। इसके चलते बच्चे के खून में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ती गई और पीलिया गंभीर रूप लेने लगा। चिकित्सकों के अनुसार मां और बच्चे के रक्त समूह में इस तरह की असंगति को आरएच असंगति कहा जाता है। नवजात में यह स्थिति गंभीर होने पर तत्काल चिकित्सकीय उपचार और लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है। बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सीएम शर्मा एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी की देखरेख में नवजात का उपचार शुरू किया गया। नवजात के ठीक होने पर परिजनों ने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों और पूरे अस्पताल स्टाफ की मेहनत एवं तत्परता के लिए उनका आभार जताया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ सीएमएस रावत एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एएन पांडेय ने वार्ड में पहुंचकर नवजात के परिजनों से मिलकर उन्हें बधाई दी।

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