क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदलने और जोरदार बारिश शुरू होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, तापमान में गिरावट आने से ठंड लौट आई है, जिसके चलते लोगों को एक बार फिर स्वेटर और गर्म कपड़े निकालने पड़े हैं। लगातार बारिश ने खेतों में पककर तैयार हो चुकी काश्तकारों की फसलों पर भी संकट खड़ा कर दिया है। मंडुवा, काली दाल और गहत की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका से काश्तकार चिंतित हैं। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो तैयार फसलों की कटाई और मड़ाई प्रभावित होने के साथ ही उपज की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।बारिश और ठंड के चलते बाजारों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। मौसम के लगातार बिगड़े मिजाज ने आम जनजीवन के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की चिंता भी बढ़ा दी है। काश्तकार अब बारिश थमने और धूप खिलने की आस लगाए बैठे हैं। क्षेत्र में लोग इंद्रदेव से बारिश बंद होने और सूर्यदेव से धूप खिलने की मनौतियां मांग रहे हैं, ताकि खेतों में तैयार फसलों को सुरक्षित समेटा जा सके।