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चमोली: गांव के दूध से तैयार होते हैं धुनारघाट के मशहूर पेड़े, स्वाद के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग

पहाड़ के बाजारों में जहां मैदानी क्षेत्रों से आने वाली मिठाइयों का कारोबार बढ़ रहा है, वहीं गैरसैंण के धुनारघाट में संजय ने अपने पुश्तैनी काम को ही स्वरोजगार का जरिया बना लिया है। संजय गांवों से दूध लेकर पारंपरिक तरीके से पेड़े तैयार करते हैं। कड़ाही में दूध को खांडकर तैयार किए गए इन पेड़ों का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। संजय बताते हैं कि पेड़े बनाने की कला उन्होंने पिता और दादा से सीखी है। अब यही पुश्तैनी हुनर उनके रोजगार का आधार बन गया है। करीब 50 किलो दूध से रोजाना 15 से 20 किलो पेड़े तैयार होते हैं, जो हाथोंहाथ बिक जाते हैं। खास बात यह है कि उनकी दुकान पर मिठाइयों के नाम पर सिर्फ पेड़े ही मिलते हैं।

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