पितृ पक्ष के अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथावाचक श्रद्धेय व्योम त्रिपाठी ने परीक्षित जी की कथा सुनाई। उन्होंने कलियुग में भगवान के नाम की महिमा और भक्ति मार्ग से ईश्वर की प्राप्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन में भक्ति बढ़ाने वाली है और इसके श्रवण से मनुष्य के कष्ट व क्लेश दूर होते हैं।