मेरठ। सूरजकुंड बाबा मनोहर नाथ मंदिर में रविवार को मथुरा से आई श्री गणेश रामलीला मंडली ने धनुष यज्ञ की लीला का भव्य मंचन किया। राजा जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार शिवधनुष तोड़ने वाले वीर से सीता का विवाह होना था। अनेक राजाओं ने प्रयास किया, लेकिन कोई धनुष को हिला तक नहीं सका। सीता को चिंतित देख गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने धनुष तोड़ दिया और सीता को स्वीकार किया। इसके बाद परशुराम के आगमन पर राम-लक्ष्मण संवाद हुआ।