बाजे-बाजे री बधइयां नंदगांव, मगन सब नर-नारी की गूंज के साथ नंदगांव में नंदोत्सव का उल्लास अपने चरम पर पहुंच गया। नंदभवन से लेकर कस्बे की गलियों तक ऐसा लगा मानो स्वयं नंदबाबा के आंगन में जन्मे लाला की खुशियां मनाने पूरा ब्रज उमड़ पड़ा हो। कभी समाज गायन की मधुर तान सुनाई दी तो कभी मल्लयुद्ध, बांस बधाई, और शंकर लीला ने श्रद्धालुओं को रोमांचित किया। सुबह बरसाना से बड़ी संख्या में गोप नंदगांव पहुंचे। नंदभवन में नंदगांव और बरसाना के समाजियों ने आमने-सामने बैठकर पारंपरिक समाज गायन और बधाई गीतों का गायन किया। रंगीली आज बाजै अरी हेरी मां, बाजे बधाइयां बे सैयां नंद दे दरबार और सुख बरसै री हेली जसुमति महल में जैसे पदों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। करीब तीन घंटे चले समाज गायन में जब प्रेम और मस्ती से सराबोर पद गूंजे तो श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे। इसके बाद नंदमहल में पारंपरिक मल्लयुद्ध ने उत्सव में अलग रंग भर दिया। सेवायत गोस्वामियों ने प्रतीकात्मक रूप से अखाड़े में उतरकर कुश्ती की। मुकाबले के बाद दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे से क्षमा मांगकर गले मिलकर ब्रज की प्रेम परंपरा का संदेश दिया। इस दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने मल्लयुद्ध में उत्साहपूर्वक भाग लिया। नंदोत्सव में हास-परिहास का दौर भी चलता रहा। बरसाना के गोप नंदबाबा के जमाई की जय बोलते तो नंदगांव के गोप बृषभानु के जमाई की जयकार करते। इसी बीच भांड स्वरूप एक गोस्वामी युवक करीब 15 फुट ऊंचे बांस पर चढ़ गया और भगवान कृष्ण-बलराम की ओर मुख कर बधाई पद सुनाने लगा। यह दृश्य देखते ही नंदभवन जयकारों और तालियों से गूंज उठा।