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कानपुर: मंदाकिनी दीदी बोलीं- सर्वेंट लीडरशिप प्रबंधन के प्रथम उदाहरण हैं हनुमान

श्रीरामलीला सोसाइटी परेड के बैनर तले आयोजित रामकथा के आठवें दिन रामचरित मानस मर्मज्ञ मंदाकिनी दीदी ने हनुमान जी के व्यक्तित्व के माध्यम से सर्वेंट लीडरशिप की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रबंधन शिक्षा में पढ़ाए जाने वाले सर्वेंट लीडरशिप सिद्धांत का प्रथम उदाहरण हनुमान जी का विलक्षण व्यक्तित्व है। यह टर्म भले ही वर्ष 1970 में रॉबर्ट ग्रीन लीफ ने दिया लेकिन सनातन संस्कृति में इस सिद्धांत का दर्शन सबसे पहले हुआ। रामकथा का आयोजन मर्चेंट चैंबर हॉल में किया गया। मंदाकिनी दीदी ने कहा कि हनुमान जी दासानुदास भाव से सबकी सेवा में संलग्न रहे। भगवान श्रीराम के आदर्शों को उन्होंने अपनी लीला में चरितार्थ करके दिखाया है कि बड़ा वही है जो सबको बड़प्पन प्रदान करे। दूसरे को विद्वता प्रदान करे। धर्म रथ के सजीव विग्रह श्रीहनुमान ने शक्ति, भक्ति, शांति और लक्ष्मी स्वरूपा माता सीता की अन्वेषण यात्रा में, मार्ग में मिलने वाली तीन नारी पात्रों से भिन्न-भिन्न प्रकार से व्यवहार किया। सुरसा के फैलते हुए मुख में जीरो पर्सनालिटी धारण कर विजय पाई। ईर्ष्या रूपी सिहिंका का संहार किया। लंका की रक्षिका लंकिनी प्रवृत्ति की अधिष्ठात्री देवी के सिर पर मुक्के का प्रहार करके उनकी विपरीत मान्यता और धारणा को बदल दिया। विशेष रूप से जेन जी के लिए यह जानना, समझना आवश्यक है कि गुण होना ही यथेष्ठ नहीं। सद्गुणों का संयमन, उनका संयोजन और सद्गुणों में संतुलन स्थापित करना भी एक कला होती है। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, राकेश गर्ग, अमरनाथ मेहरोत्रा, पवन अग्रवाल, वीरेंद्र अग्रवाल, आलोक अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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