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VIDEO: ललही छठ पर्व आज, संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए माताओं की पूजा

अयोध्या। देवकली माता के मंदिर परिसर में स्थित कुंड में संतान की लंबी उम्र और उनकी खुशहाली के लिए रखा जाने वाला ललही छठ (हल षष्ठी) का पावन पर्व आज मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। इस कारण से इस पर्व को बलराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। माताएं अपनी संतान के कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए जाते हैं। इस पर्व का हिंदू धर्म में गहरा महत्व है। ललही छठ का धार्मिक महत्व ललही छठ का व्रत संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। यह पर्व बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। बलराम जी को हलधर के नाम से भी पुकारा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत का विशेष उल्लेख मिलता है। माताएं निर्जला रहकर यह व्रत करती हैं। वे अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। पूजन सामग्री और विधि ललही छठ की पूजा में कई विशेष सामग्री का उपयोग होता है। इसमें भैंस का दूध, घी और दही प्रमुख हैं। महुआ के फल, फूल और पत्ते भी पूजा में शामिल किए जाते हैं। पसई का चावल, जिसे तिन्नी का चावल भी कहते हैं, मुख्य सामग्री में से एक है। गोबर, कुश, हल्दी और रोली का प्रयोग भी किया जाता है। सात प्रकार के अनाज और धान का लाजा भी अर्पित किया जाता है। पूजन विधि के अनुसार, सबसे पहले जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद पिसी हुई हल्दी घोलकर चढ़ाई जाती है। अंत में दही अर्पित करने का विधान है। यह पूजा विधिपूर्वक संपन्न की जाती है।

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