आगरा में ताज के साये में औद्योगिक विकास गंभीर संकट से गुजर रहा है। उद्योगों की राह में ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) की बंदिशों के चलते जहां नए उद्योग लगने की उम्मीदें दम तोड़ रही हैं, वहीं पुराने भी शहर छोड़कर जाने को मजबूर हैं। टीटीजेड लागू होने के बाद 292 उद्योग-धंधों पर ताला लग चुका है। वहीं नए निवेश ने भी जेवर की राह पकड़ ली है। लघु उद्योग दिवस पर उद्यमियों को संजीवनी का इंतजार है। सुप्रीम कोर्ट ने यहां 10 अक्तूबर 2024 से नए उद्योगों की स्थापना और विस्तार पर रोक लगा रखी है। विगत 23 जुलाई के नए आदेश से उम्मीद तो जागी लेकिन राह अब भी आसान नजर नहीं है। 410 एमएसएमई इकाइयों के लंबित आवेदनों में आगरा में 208 इकाइयों का सर्वे हुआ। इसमें 128 ने बंदिश और भविष्य की आशंकाओं को लेकर निवेश से हाथ खड़े कर दिए। 80 सूक्ष्म इकाइयों ने मानक पूरे किए हैं। इनका भविष्य अब राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सहमति पर निर्भर करेगा।