हॉकी की नर्सरी के रूप में पहचान रखने वाले जालंधर के गांव मिट्ठापुर के 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी प्रभदीप सिंह ने अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू को यादगार बना दिया। चीन में आयोजित जूनियर एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट में प्रभदीप ने हर मैच में गोल दागते हुए भारतीय जूनियर हॉकी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। भारत लौटने पर प्रभदीप का अमृतसर में परिजनों और क्षेत्रवासियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया। प्रभदीप ने कहा कि यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था और भारत के लिए गोल्ड जीतना उनके लिए बेहद गर्व का पल है। उन्होंने बताया कि कोरिया, जापान, मलेशिया और पाकिस्तान जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ मुकाबले चुनौतीपूर्ण रहे, लेकिन पूरी टीम की मजबूत बॉन्डिंग, मेहनत और एकजुटता ने जीत का रास्ता बनाया। प्रभदीप की सफलता के पीछे उनके पिता राजिंदर सिंह का बड़ा योगदान रहा। जब प्रभदीप करीब 8-9 साल के थे, तब उन्हें क्रिकेट में रुचि थी। बाद में उन्होंने हॉकी खेलने की इच्छा जताई। उस समय गांव का हॉकी ग्राउंड बंद था, इसलिए पिता ने घर के बाहर ईंटें रखकर उन्हें ड्रिब्लिंग और शॉट लगाने का अभ्यास करवाना शुरू किया। इसके बाद कोच दविंदर से प्रशिक्षण लेने के बाद प्रभदीप ने खदूर साहिब अकादमी और फिर सुरजीत हॉकी अकादमी में अभ्यास किया। मेहनत के दम पर उन्होंने सब-जूनियर और जूनियर नेशनल में जगह बनाई। प्रभदीप इससे पहले बेल्जियम और नीदरलैंड के यूरोपीय दौरों पर भी भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं। मां की अरदास और सीनियर खिलाड़ियों के टिप्स बने हौसला प्रभदीप की मां सुखविंदर कौर ने बेटे की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि उसका सपना हमेशा हॉकी के जरिए देश का नाम रोशन करना रहा है। जब प्रभदीप पहली बार विदेश में खेलने जा रहे थे, तब उन्होंने वाहेगुरु से उसके अच्छे प्रदर्शन के लिए अरदास की थी। मिट्ठापुर गांव ने भारतीय हॉकी को मनप्रीत सिंह और मनदीप सिंह जैसे अंतरराष्ट्रीय ओलंपियन खिलाड़ी भी दिए हैं। प्रभदीप ने बताया कि गांव के सीनियर खिलाड़ी लगातार उन्हें खेल में सुधार के लिए महत्वपूर्ण टिप्स देते रहते हैं। अब उनका लक्ष्य और ज्यादा मेहनत करके जल्द भारतीय सीनियर हॉकी टीम में अपनी जगह पक्की करना है।