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बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, मोगा मंडी में खुले में पड़ी खरीदी गई धान की फसल; पुख्ता इंतजाम नहीं, दोबारा बारिश से भारी नुकसान का डर

पंजाब में रविवार सुबह से हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मंडियों में धान की फसल लेकर पहुंचे किसानों को अब बारिश से उपज बचाने की चिंता सता रही है। मंडियों में फसल को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। मोगा मंडी में खरीदी गई धान की फसल भी खुले आसमान के नीचे पड़ी है। किसानों को आशंका है कि यदि दोबारा बारिश हुई तो फसल भीगने से खराब हो सकती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों के अनुसार, धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत तक होने पर ही खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। बारिश के कारण फसल में नमी बढ़ने से खरीद प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, जो फसल पहले से खरीदी जा चुकी है, उसकी लिफ्टिंग में देरी और खुले में भंडारण भी किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। मोगा मंडी में 12,970 मीट्रिक टन धान की खरीद आंकड़ों के अनुसार, मोगा मंडी में अब तक 18,352.40 मीट्रिक टन धान की आमद हो चुकी है, जिसमें से 12,970.16 मीट्रिक टन की खरीद की गई है। इसके मुकाबले मोगा जिले में अब तक केवल 4,399.02 मीट्रिक टन धान की लिफ्टिंग हुई है। खरीद और उठान के बीच अंतर के कारण मंडियों में खरीदी गई फसल खुले में पड़ी है। ऐसे में बारिश से फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। शेड कम, खुले में पड़ी फसल किसान गुरसेवक सिंह ने बताया कि उनके पास कुल 12 एकड़ जमीन है, जिसमें छह एकड़ जमीन ठेके पर ली हुई है। शनिवार को वह कुछ एकड़ की फसल मंडी में लेकर आए थे, लेकिन सुखाने के बावजूद अभी तक उसकी खरीद नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मंडी में केवल एक-दो शेड हैं, जबकि अधिकतर फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी है। ऐसे में बारिश होने पर फसल को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। सूखी फसल दोबारा भीगी, किसानों की बढ़ी परेशानी किसान दर्शन सिंह ने बताया कि उनके पास 14 एकड़ जमीन है, जिसमें पांच एकड़ जमीन ठेके पर है। पांच एकड़ की फसल काटकर मंडी में लाई गई थी। फसल को सुखाने के बाद खरीद की उम्मीद थी, लेकिन बारिश के कारण सूखी फसल दोबारा भीग गई। इससे उनकी चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और जमीन के ठेके पर काफी खर्च करना पड़ता है। यदि बारिश के कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है या खरीद में देरी होती है, तो उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। फसल की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम की मांग बारिश के बीच मंडियों में फसल की सुरक्षा, खरीद में तेजी और खरीदी गई उपज की समय पर लिफ्टिंग सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है। किसानों की मांग है कि मंडियों में पर्याप्त शेड, तिरपाल और जल निकासी के उचित प्रबंध किए जाएं, ताकि खुले में पड़ी फसल को भीगने से बचाया जा सके। किसानों को डर है कि यदि मौसम फिर खराब हुआ और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है।

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