छात्रों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने सोमवार को जनसिस कॉलेज में विशेष जांच की। कॉलेज में करीब 400 से 500 छात्रों के लिए रोजाना तीन समय भोजन तैयार किया जाता है। जांच के दौरान रसोई और फूड प्रीपेरेशन एरिया में कई कमियां सामने आईं। टीम ने कम गुणवत्ता वाली सॉस और मसालों की जांच की। कुछ सॉस की कीमत करीब 50 रुपये प्रति किलो बताई गई, जबकि कुछ मसालों के ब्रांड व स्रोत संबंधी जानकारी भी संतोषजनक नहीं मिली। विद्यार्थियों को मक्खन के नाम पर दिए जा रहे फैट स्प्रेड का स्टॉक टीम ने हटवाकर जब्त कर लिया। भोजन में रंगों के इस्तेमाल की भी जांच की गई। सोयाबीन में लाल और हरी सब्जियों में हरे रंग के इस्तेमाल संबंधी सामग्री को मौके से हटवाया गया। रसोई व स्टोरेज एरिया में सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था में भी कमियां मिलीं। विद्यार्थियों ने चूहों व कॉकरोचों से संबंधित तस्वीरें टीम को उपलब्ध करवाईं। पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतों के बाद विभाग ने पानी के सैंपल भी लिए। कुछ फूड हैंडलरों द्वारा ग्लव्स, प्रोटेक्टिव कपड़े और व्यक्तिगत स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। एक कर्मचारी की जेब से तंबाकू उत्पाद मिलने पर भी कार्रवाई की गई। टीम ने विद्यार्थियों से सीधे बातचीत कर भोजन की गुणवत्ता संबंधी फीडबैक लिया। जांच में मिली कमियों के मद्देनजर कॉलेज प्रबंधन को इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद नियमों के विपरीत परिणाम मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि उक्त कालेज के विद्यार्थियों ने कैंटीन में साफ सफाई और घटिया भोजन परोसने की गुप्त शिकायत फूड सेफ्टी विभाग के इंस्पेक्टर से की थी। ये भी बताया था कि चावल में काकरोच, आटे में सूंडियां और बर्तनों में चूहे पड़े रहते हैं। ये सब कुछ फोटो व वीडियो के साथ भेजा था।