मोगा में पराली जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले कुछ दिनों से मोगा और आसपास के गांवों में किसान धड़ल्ले से खेतों में पराली को आग लगा रहे हैं। ग्राउंड जीरो पर हालात ऐसे हैं कि दिनभर में 100 से अधिक किसान खेतों में आग लगाते दिखाई दे रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन के सरकारी आंकड़ों में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या पिछले 15 दिनों में महज 23 बताई जा रही है। ऐसे में जमीनी हकीकत और प्रशासन के आंकड़ों में बड़ा अंतर नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि शाम करीब 4 बजे ही आसमान में धुएं के कारण अंधेरा छाने लगता है। बताया जा रहा है कि कुछ किसान देर शाम खेतों में आग लगा रहे हैं, ताकि सैटेलाइट की तस्वीरों में आग की घटनाएं दर्ज न हो सकें। एक तरफ जिला प्रशासन किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक कर रहा है और नियमों का पालन करवाने के प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ किसान बेखौफ होकर खेतों में आग लगाकर मौके से चले जाते हैं। पराली जलने से उठने वाला जहरीला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। इसके कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ अब तक किसी बड़ी या ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मोगा के सेलीना, निधांवाला, सदासिंह वाला, खोसा रणधीर, कोट ईसे खां, फतेहगढ़ कोरोटाना, धल्लेके, लोहारा और जनेर सहित कई गांवों में शाम 4 बजे के बाद खेतों में पराली जलने के मामले दिखाई दे रहे हैं। अब सवाल यह है कि जब ग्राउंड जीरो पर इतनी बड़ी संख्या में आग की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो प्रशासन के रिकॉर्ड में इनकी संख्या इतनी कम क्यों है और आखिर पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब होगी।