आम आदमी पार्टी पर 1984 के सिख नरसंहार को लेकर दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोप लगा है। भाजपा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब की जनता के सामने आप का राजनीतिक ढोंग पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। पार्टी पर आरोप है कि वह एक तरफ नरसंहार पर राजनीति कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस से राजनीतिक संबंध बनाए हुए है। विज्ञप्ति के अनुसार, आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ राजनीतिक समझौते किए हैं। उसने मंच साझा किए और सरकार बनाने में भी सहयोग लिया। अरविंद केजरीवाल को सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ जैसे नेताओं से राजनीतिक रिश्तों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने 1984 के पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अटल बिहारी वाजपेयी, मदन लाल खुराना और विजय कुमार मल्होत्रा ने संसद में आवाज उठाई थी। 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 1984 के मामलों की जांच में अभूतपूर्व तेजी लाई है। केंद्र सरकार ने बंद पड़े मामलों को दोबारा खोलने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। इस दल ने तेजी से जांच शुरू की और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर मुख्य दोषियों को जेल भेजा गया। पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए पुनर्वास और रोजगार के कदम उठाए गए। इसके तहत 3,465 सरकारी नौकरियां और वित्तीय सहायता मुहैया कराई गई। विज्ञप्ति में आम आदमी पार्टी पर मगरमच्छ के आंसू बहाने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि पंजाब की जनता अब इस दोहरे राजनीतिक चरित्र को अच्छी तरह समझ चुकी है। पार्टी को अपना ढोंग बंद कर पंजाब की जनता को अपनी अवसरवादी राजनीति का हिसाब देना चाहिए। यह आरोप लगाया गया है कि पार्टी 1984 के नाम पर केवल राजनीति कर रही है।