पीजीआई में विश्वस्तरीय इलाज के दावों के बीच कार्डियक इमरजेंसी की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। रात के समय सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ के साथ मरीज पहुंचने पर रेजिडेंट डॉक्टर तत्काल ईसीजी कराना चाहते हैं, लेकिन नियमित ड्यूटी पर ईसीजी टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में टेक्नीशियन को फोन कर बुलाना पड़ता है। दिल के गंभीर मरीजों के लिए शुरुआती जांच में होने वाली यह देरी चिंता बढ़ा रही है। पीजीआई में कार्डियक ट्रायेज के लिए अलग इमरजेंसी की शुरुआत 9 मार्च को हुई थी। करीब सात महीने बीतने के बाद भी यहां अपनी प्रयोगशाला और रेडियोडायग्नोसिस की सुविधाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। मरीजों के जांच नमूने लेने के लिए चार कर्मचारियों की जरूरत बताई जा रही है, जबकि फिलहाल केवल एक कर्मचारी यह जिम्मेदारी संभाल रहा है। इससे जांच और उपचार की प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। कार्डियक इमरजेंसी में रात के समय ईसीजी टेक्नीशियन की नियमित ड्यूटी नहीं होने से रेजिडेंट डॉक्टरों को मरीज आने पर फोन के जरिए टेक्नीशियन बुलाना पड़ता है। हृदय संबंधी आपात स्थिति में ईसीजी शुरुआती जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में टेक्नीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने से तत्काल उपचार की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।