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गुरबाणी जीवन की मुश्किलों में सही मार्गदर्शन देती है: जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सिख कौम, खालसा पंथ और गुरु नानक नाम लेवा संगत को लाख-लाख बधाई दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1604 में पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी महाराज ने श्री रामसर साहिब के किनारे भाई गुरदास जी से आदि ग्रंथ साहिब का पहला स्वरूप लिखवाया था। इसके बाद सचखंड श्री दरबार साहिब में इसका पहला प्रकाश किया गया। ब्रह्मज्ञानी बाबा बुद्धा साहिब को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले ग्रंथी होने का गौरव प्राप्त है और उन्होंने ही पहला मुखवाक लिया था। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि यह ऐतिहासिक दिवस केवल सिख समुदाय ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए विशेष महत्व रखता है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी इलाही ज्ञान का महान भंडार हैं, जो मानवता को सदैव सही जीवन जीने की राह दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि “गुरबाणी इस जग महि चानणु” के सिद्धांत के अनुसार जब गुरबाणी मनुष्य के मन में बसती है और वह उसके अनुसार जीवन व्यतीत करता है तो जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्गदर्शन मिलता है। उन्होंने संगत से अपील की कि पहले प्रकाश पर्व पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी से जुड़ने और गुरबाणी के अनुसार जीवन जीने का संकल्प लें। साथ ही उन्होंने प्रार्थना की कि पूरी मानवता अपनी समस्याओं के समाधान और बेहतर जीवन के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से प्रेरणा ले।

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