मध्य प्रदेश में हार्ड ग्राउंड बारहसिंगा का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके इस दुर्लभ वन्यजीव की आबादी कान्हा टाइगर रिजर्व में अब बढ़कर 1100 के पार पहुंच गई है। वर्ष 1970 में इनकी संख्या महज 66 रह गई थी, लेकिन वन विभाग के प्रयासों और वैज्ञानिक संरक्षण से बारहसिंगा की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा के नए छौनों का जन्म भी इस सफलता को आगे बढ़ा रहा है। इस सीजन में अब तक 11 नवजात छौने देखे जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि इस सीजन में कुल 51 नए छौनों के जन्म की खबर भी सामने आई है। नवजात छौने बेहद संवेदनशील होते हैं, इसलिए कान्हा प्रबंधन उनकी लगातार निगरानी कर रहा है।
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कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रविन्द्रमणि त्रिपाठी के मुताबिक, बारहसिंगा संरक्षण के लिए कान्हा से सतपुड़ा और बांधवगढ़ जैसे अन्य टाइगर रिजर्व में भी इनकी आबादी विकसित की जा रही है। सतपुड़ा में बारहसिंगा की संख्या 300 से अधिक हो चुकी है, जबकि बांधवगढ़ में लगभग 48 बारहसिंगा भेजे जा चुके हैं। इस वर्ष वहां एक और समूह भेजने की तैयारी है।
बारहसिंगा को अलग-अलग संरक्षित क्षेत्रों में बसाने का उद्देश्य किसी महामारी या अन्य संकट की स्थिति में पूरी प्रजाति को सुरक्षित रखना है। कान्हा प्रबंधन का लक्ष्य इनकी आबादी को 1500 से अधिक करना और मध्यप्रदेश के दूसरे जंगलों में भी इनका कुनबा बढ़ाना है।