जहां उम्मीदें खत्म हो जाती हैं, वहीं से कभी-कभी चमत्कार शुरू होते हैं... नेपाल में तबाही के 10 दिन बाद जब सबको लगा कि अब मलबे में सिर्फ खामोशी बची है, तभी उसी खामोशी को चीरती हुई एक जिंदा सांस बाहर आई... 60 साल की एक मां, जो 10 दिनों तक मौत के अंधेरे में जिंदा रहने की जंग लड़ती रही, और जब नेपाल के जवानों ने उसे बाहर निकाला तो पूरे देश की आंखें नम हो गईं... ये कहानी सिर्फ एक बचाव की नहीं, ये कहानी है हौसले की, उम्मीद की और उन जवानों की जो अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जिंदगी बचा रहे हैं...