सीनियर सिटीजन फोरम ऊना की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को फोरम कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष जीआर वर्मा ने की। इस दौरान समाज से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में फोरम अध्यक्ष ने युवाओं के रोजगार, बुजुर्गों की स्वास्थ्य सुविधाओं और ऊना शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक को लेकर चिंता जताई। जीआर वर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, बिजली, पानी और परिवहन जैसी सुविधाओं में पहले की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को रोजगार हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय स्वरोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और छोटे व्यवसायों की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। फोरम अध्यक्ष ने कहा कि बढ़ते मैकेनाइजेशन और कंप्यूटरीकरण ने रोजगार के स्वरूप को काफी बदल दिया है। उन्होंने अपने बैंकिंग क्षेत्र के अनुभव का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 1972 में जब वह बैंक मैनेजर थे, तब 50 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी से जुड़े काम को संभालने के लिए 26 कर्मचारियों की जरूरत होती थी। आज करीब 400 करोड़ रुपये के काम को केवल छह कर्मचारी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से स्पष्ट है कि तकनीक ने काम करने के तरीकों को पूरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में युवाओं को समय की जरूरत के अनुसार तकनीकी रूप से दक्ष बनना होगा, ताकि वे बदलते रोजगार बाजार में अपनी जगह बना सकें। जीआर वर्मा ने बुजुर्गों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों में हृदय संबंधी बीमारियां आम हैं, लेकिन जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बुजुर्गों को उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बार-बार दूसरे शहरों में इलाज करवाना बुजुर्गों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक तथा शारीरिक रूप से कठिन होता है। सरकार को जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को अपने ही जिले में बेहतर उपचार मिल सके। फोरम ने बुजुर्गों से जुड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में बार-बार किए जा रहे बदलावों पर भी सवाल उठाए। जीआर वर्मा ने कहा कि यदि किसी योजना में भ्रष्टाचार या अनियमितता सामने आती है तो पूरी योजना को बंद करना या उसमें बार-बार परिवर्तन करना उचित समाधान नहीं है। उन्होंने सरकार से बेहतर निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने की मांग की। उनका कहना था कि स्वास्थ्य योजनाओं में ऐसी दीर्घकालिक नीति होनी चाहिए, जिससे जरूरतमंद बुजुर्गों को समय पर उपचार मिल सके और उन्हें कागजी प्रक्रियाओं के कारण परेशानी न उठानी पड़े। बैठक में ऊना शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर भी चिंता जताई गई। फोरम अध्यक्ष ने कहा कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे आवारा कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। इनके कारण लोगों में भय का माहौल है और किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों की नसबंदी को लेकर किए गए प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए हैं। वहीं, शेल्टर होम बनाने जैसे प्रस्तावों को लागू करने में समय लग सकता है। ऐसे में स्थायी व्यवस्था तैयार होने तक प्रशासन को आम जनता की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। फोरम ने सरकार और प्रशासन से युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, बुजुर्गों के लिए विशेषज्ञ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने और ऊना शहर को आवारा कुत्तों के आतंक से राहत दिलाने की मांग की। फोरम ने स्पष्ट किया कि इन समस्याओं का समाधान केवल अस्थायी कार्रवाई से नहीं, बल्कि ठोस और दीर्घकालिक योजना से ही संभव है।