करीब तीन दशक से राजनीतिक घोषणाओं और आश्वासनों के बीच उलझी क्यारी-गुंडाह-दवाईधार सड़क एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस सड़क की कई नेताओं ने घोषणा की, बजट भी मिला लेकिन उसके बाद भी परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई। इस सड़क को लेकर स्थानीय लोगों की अहम बैठक हुई। बैठक में सड़क को लेकर गहन मंथन किया गया। क्यारी के कपिल, बलबीर सिंह, रूप सिंह, बबलू, मित्र सिंह, कुलदीप सिंह, संजू, यशपाल, विनोद कुमार और भीम सिंह सहित ग्रामीणों का कहना है कि इस बार लोग केवल घोषणा नहीं, बल्कि सड़क को धरातल पर देखना चाहते हैं। युवाओं ने अपनी पारंपरिक खुमली व्यवस्था के माध्यम से भी इस मांग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। गांवों से लेकर सामाजिक आयोजनों तक सड़क निर्माण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 1987 के बाद से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जब भी रेणुका जी मेले में पहुंचते थे, इस सड़क का मुद्दा उठता था। इसके बाद प्रेम कुमार धूमल और जयराम ठाकुर के कार्यकाल में भी सड़क निर्माण की घोषणाएं हुईं। ग्रामीणों का कहना है कि जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते हुए सड़क के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। ग्रामीणों का दावा है कि इस सड़क का इतिहास इससे भी पुराना है। हिमाचल के गठन के शुरुआती दौर में प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के इस मार्ग से पैदल आने-जाने और क्यारी गांव में रात्रि विश्राम करने की बातें आज भी बुजुर्गों की स्मृतियों में दर्ज हैं। ग्रामीणों के मुताबिक डॉ. परमार ने इस मार्ग को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसे कई अन्य सड़कों से जोड़ने का सपना देखा था। इस सड़क से शिलाई और रेणुका जी विधानसभा क्षेत्रों की कई पंचायतों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क बनने से क्यारी-गुंडाह से नाहन की दूरी करीब 65 से 70 किलोमीटर रह जाएगी। इससे चंडीगढ़, सोलन, शिमला, परवाणू और कालाअंब की ओर आवागमन आसान होगा। साथ ही कृषि, व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं को भी गति मिल सकती है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और उद्योगमंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान से मांग की कि अबकी बार कोई नई घोषणा न करके सड़क की मांग को धरातल पर उतारें।