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पांवटा साहिब के कर्मचारियों को मिलेगी राहत! हिमाचल-उत्तराखंड के अस्पताल ईएसआई पैनल में होंगे शामिल

औद्योगिक क्षेत्र पांवटा साहिब में कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने का मुद्दा एक बार फिर उठा है। हिमाचल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के गोंदपुर सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में ईएसआई से जुड़ी समस्याओं और मांगों पर चर्चा हुई। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी), बद्दी के क्षेत्रीय निदेशक धर्मवीर सिंह ने आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ अस्पतालों को ईएसआई पैनल में शामिल करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। धर्मवीर सिंह ने कहा कि चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थानीय इकाई की मांगों और समस्याओं को ध्यान से सुना गया है। इसके लिए प्राथमिकता वाले अस्पतालों की सूची चैंबर की ओर से भेजी जाएगी। उन्होंने पांवटा साहिब की ईएसआईसी डिस्पेंसरी में छह बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध करवाने की बात भी कही। साथ ही स्थानीय डिस्पेंसरी में लैब, एंबुलेंस और स्टाफ से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध करवाने का भी उल्लेख किया। कार्यशाला में चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सतीश कुमार गोयल और सलाहकार देवव्रत यादव ने औद्योगिक क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं रखीं। उन्होंने कहा कि पांवटा साहिब प्रदेश के पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है और यहां करीब 30 हजार कर्मचारी-मजदूर पंजीकृत हैं। उनके अनुसार, क्षेत्र में ईएसआई अस्पताल और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जुनेजा और सिद्धि विनायक अस्पताल के साथ उत्तराखंड के अस्पतालों तथा ग्राफिक एरा अस्पताल को भी ईएसआई पैनल में शामिल करने की मांग रखी। चैंबर की ओर से पांवटा साहिब स्थित ईएसआईसी डिस्पेंसरी में सुधार और उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की मांग उठाई गई। प्रतिनिधियों ने डॉक्टरों की कमी, सीमित नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट और रेफरल प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में ईएसआई अस्पताल नहीं होने से कर्मचारियों को दूसरे अस्पतालों में उपचार के लिए निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में डिस्पेंसरी में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवाना और जरूरत के अनुसार अस्पतालों से टाई-अप करना जरूरी है। कार्यशाला में आपातकालीन स्थिति में कैशलेस इलाज की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग भी उठाई गई। चैंबर प्रतिनिधियों ने कहा कि कुछ मामलों में टाई-अप अस्पताल ईएसआई की मंजूरी मिलने तक मरीजों से पैसे ले रहे हैं। उन्होंने आपातकालीन भर्ती के दौरान मरीजों को आर्थिक परेशानी से बचाने के लिए व्यवस्था में सुधार की मांग की। इसके अलावा एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और लैब टेस्टिंग जैसी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया। प्रतिनिधियों ने ईएसआई लाभार्थियों और उनके परिवारों को टाई-अप अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा देने, जीवन रक्षक उपकरणों से लैस एंबुलेंस उपलब्ध करवाने और कैंसर मरीजों के लिए दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। क्षेत्रीय निदेशक धर्मवीर सिंह ने कार्यशाला में ईएसआई से संबंधित कुछ बदलावों की जानकारी भी दी। बैठक में चैंबर की ओर से रखी गई मांगों और समस्याओं पर चर्चा हुई। हालांकि, अस्पतालों को पैनल में शामिल करने और डिस्पेंसरी में सुविधाएं बढ़ाने के लिए कोई निश्चित समयसीमा उपलब्ध जानकारी में नहीं बताई गई। कार्यशाला के दौरान एंबुलेंस का मुद्दा उठने पर बैठक में हल्का-फुल्का माहौल भी बन गया। चैंबर अध्यक्ष सतीश गोयल ने कहा कि पांवटा साहिब में एंबुलेंस उपलब्ध करवाने की मांग करीब दो दशक से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस का चालक तीन साल तक पांवटा साहिब ईएसआई में तैनात जरूर रहा, लेकिन एंबुलेंस का इंतजार अब भी बना हुआ है। गोयल के इस सवाल पर कि आखिर एंबुलेंस कहां गई, बैठक में मौजूद लोगों की हंसी गूंज उठी। कार्यशाला में केहर सिंह चौहान सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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