किंगल खड्ड से संचालित उठाऊ पेयजल योजना की पुरानी पाइपलाइन अब क्षेत्र की बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करने में नाकाफी साबित हो रही है। वर्ष 1965 में बिछाई गई इस लाइन की क्षमता बढ़ाने और पेयजल योजना में सुधार की मांग उठने लगी है। योजना से जुड़े कार्य में देरी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संदीप मंगल ने संबंधित विभाग और प्रशासन से योजना की तकनीकी जांच करवाने तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि छह दशक से अधिक पुरानी पाइपलाइन मौजूदा जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त पानी की आपूर्ति करने में सक्षम है या नहीं, इसका आकलन किया जाना चाहिए। संदीप मंगल के अनुसार, वर्ष 1965 में पाइपलाइन बिछाए जाने के समय क्षेत्र की आबादी और पानी की मांग काफी कम थी। पिछले कई दशकों में आबादी और परिवारों की संख्या बढ़ने से पेयजल की जरूरतें भी बढ़ी हैं। ऐसे में पुरानी लाइन की क्षमता वर्तमान मांग के अनुरूप नहीं होने पर ग्रामीणों को पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने में परेशानी हो सकती है।