अब स्नातक की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अपनी स्ट्रीम के विषयों तक ही सीमित नहीं रहना पड़ेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू किए गए नए प्रावधानों में विद्यार्थियों को अपनी रुचि और भविष्य की जरूरत के अनुसार अलग-अलग विषय चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। मल्टी डिसिप्लिनरी शिक्षा के तहत विज्ञान पढ़ने वाला विद्यार्थी कला या वाणिज्य के अपनी पसंद के विषय को पढ़ाई में शामिल कर सकेगा। इसी तरह कला और वाणिज्य वर्ग के विद्यार्थी भी विज्ञान से जुड़े विषय का चयन कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों का ज्ञान हासिल करने का अवसर मिलेगा। स्नातक या ऑनर्स की पढ़ाई के लिए विद्यार्थी को एक विषय कोर विषय के रूप में चुनना होगा। इस कोर विषय में विद्यार्थी को 64 क्रेडिट पूरे करने होंगे। इसके साथ ही वह अपनी रुचि के दूसरे विषयों का भी चयन कर सकेगा। नए प्रावधान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थी जरूरी नहीं कि अपने कोर विषय में ही आगे की पढ़ाई जारी रखे। यदि वह किसी दूसरे पसंदीदा विषय में आगे बढ़ना चाहता है तो ऐसा कर सकता है। इसके लिए उस विषय में कम से कम 20 क्रेडिट हासिल करना जरूरी होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों की अन्य क्षमताओं को विकसित करने के लिए क्षमता संवर्धन से जुड़े विषयों का भी प्रावधान किया गया है। इनमें अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और पर्यावरण जैसे विषय शामिल हैं। इन विषयों के अध्ययन से विद्यार्थियों की भाषाई, सामाजिक और अन्य उपयोगी क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा कौशल संवर्धन के तहत ऐसे विषयों को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाएगा, जिनसे विद्यार्थियों में रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़ी दक्षताएं विकसित हो सकें। यानी स्नातक की पढ़ाई केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक कौशल से भी जुड़ सकेगी। खास बात यह है कि यदि किसी कॉलेज में विद्यार्थी की ओर से चुने गए विषय को पढ़ाने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं है, तो ऑनलाइन माध्यम का विकल्प भी मौजूद रहेगा। विद्यार्थी स्वयं पोर्टल के माध्यम से घर बैठे संबंधित विषय की पढ़ाई कर सकेंगे। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की जा चुकी है। नए प्रावधानों के तहत विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों का अध्ययन करने की स्वतंत्रता दी गई है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से विद्यार्थी अपनी रुचि और भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए विषयों का चयन कर सकेंगे। इससे स्नातक स्तर पर पढ़ाई को अधिक लचीला और विद्यार्थियों की पसंद के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है।