देव संस्कृति और आस्था के रंग में रंगे देहुरी मेले के दूसरे दिन देवताओं का भव्य नृत्य आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। देवता खुडीजल के सम्मान में आयोजित मेले में देवता खुडीजल, देवता ठेंशरी और खोडू देवता ने करीब एक घंटे तक देव नृत्य कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देव नृत्य के दौरान पूरा मेला स्थल ढोल-नगाड़ों की गूंज से सराबोर रहा। बजंतरियों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर शानदार प्रस्तुति दी। देवताओं के नृत्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मेला स्थल पर पहुंचे थे। बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और श्रद्धालु देव नृत्य के साक्षी बने रहे। इससे पहले मंदिर से मेला स्थल तक पहुंचे तीनों देवताओं का स्थानीय महिलाओं ने फूलों की वर्षा कर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। देवताओं के मेला स्थल पर पहुंचते ही माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। सैकड़ों लोग सम्मान में अपनी जगह से खड़े हो गए और नतमस्तक होकर देवताओं का आशीर्वाद लिया। इसके बाद देवताओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देव नृत्य किया। करीब एक घंटे तक चले इस आयोजन ने मेले में मौजूद लोगों को देव संस्कृति से जोड़ दिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और बारिश के बीच देव नृत्य का नजारा लोगों के लिए खास आकर्षण रहा। देहुरी मेले में देव नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि कुल्लू की समृद्ध देव परंपरा और संस्कृति की अभिव्यक्ति भी है। मेले में जुटे लोगों ने इस पारंपरिक आयोजन का जमकर आनंद लिया और देवताओं के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।