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कांगड़ा: ज्वालामुखी मंदिर में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, दूसरे नवरात्र करीब पांच हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में सोमवार को शारदीय अश्विन नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुजारी वर्ग ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न करवाई। दूसरे नवरात्र पर पहले दिन की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। शाम तक करीब पांच हजार श्रद्धालुओं ने मां ज्वाला के दरबार में माथा टेककर पवित्र ज्योतियों के दर्शन किए। मंदिर में सुबह पांच बजे पूजा-अर्चना और आरती के बाद गर्भगृह के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मां के जयकारे लगाते हुए दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर प्रशासन की ओर से किए गए प्रबंधों के चलते श्रद्धालु कतारों में लगकर दर्शन करते रहे। नवरात्र के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। मंदिर के पुजारी वासुदेव शर्मा ने बताया कि नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। मां ब्रह्मचारिणी को तप, त्याग, संयम और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से साधक को आत्मबल मिलता है और जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी को तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा के नामों से भी जाना जाता है। देवी का स्वरूप शांत, सौम्य और सरल है। सफेद वस्त्र धारण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को तपस्या, धैर्य और संयम का संदेश देती हैं। नवरात्र के दौरान शक्तिपीठ ज्वालामुखी में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है।

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