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पहाड़ दरका तो सड़क पर खुद लग जाएंगे बैरिकेड, हमीरपुर के छात्र ने बनाया ‘स्लोप सेंटिनल एआई’ मॉडल

पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। बारिश के दौरान पहाड़ से मलबा गिरने या जमीन खिसकने से सड़क पर चल रहे वाहन चालकों और राहगीरों की जान जोखिम में पड़ सकती है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए एसडी पब्लिक स्कूल डुग्घा के दसवीं कक्षा के छात्र अक्षित ठाकुर ने एक तकनीकी मॉडल तैयार किया है। इसका नाम ‘स्लोप सेंटिनल एआई’ रखा गया है। इस मॉडल की खासियत यह है कि भूस्खलन के संभावित संकेत मिलने पर अलार्म बजाने और सड़क के दोनों ओर बैरिकेड लगाने की व्यवस्था को सक्रिय करने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को समय रहते खतरे के प्रति सतर्क करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करना है। अक्षित ठाकुर ने इस मॉडल को तैयार करने के लिए यूट्यूब से विचार और तकनीकी जानकारी जुटाई। इसके बाद उस जानकारी का इस्तेमाल अपने प्रोजेक्ट में किया। मॉडल में तीन सेंसर लगाए गए हैं, जो अलग-अलग परिस्थितियों में खतरे के संकेत पहचानने के लिए तैयार किए गए हैं। सॉयल सेंसर: जमीन खिसकने से जुड़े संकेतों को पहचानने के लिए लगाया गया है। संकेत मिलने पर लाल बत्ती जलाने की व्यवस्था है। रेन सेंसर: बारिश और उसकी तीव्रता को मापने में मदद करेगा। बारिश के आधार पर संभावित खतरे का संकेत देने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया है। टिल्ट सेंसर: जमीन के झुकाव या हलचल का पता लगाने के लिए लगाया गया है। इन तीनों सेंसर से मिलने वाले संकेतों के आधार पर मॉडल खतरे की पहचान करने और चेतावनी प्रणाली को सक्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। मॉडल में आर्डुइनो को मुख्य नियंत्रक के रूप में इस्तेमाल किया गया है। यह तीनों सेंसर से मिलने वाले संकेतों को पढ़ेगा और निर्धारित मानकों के आधार पर चेतावनी प्रणाली को सक्रिय करेगा। खतरे का संकेत मिलने पर अलार्म बजेगा। इसके साथ ही सेंसर के समीप सड़क के दोनों ओर बैरिकेड लगाने की व्यवस्था स्वयं सक्रिय होने की परिकल्पना की गई है। इससे भूस्खलन या जमीन खिसकने की आशंका होने पर सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक सड़कों पर इस तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल करने से पहले इसकी तकनीकी विश्वसनीयता, सेंसर की सटीकता और अलग-अलग मौसम में काम करने की क्षमता का परीक्षण जरूरी होगा। आर्डुइनो एक खुला इलेक्ट्रॉनिक्स मंच है, जिसका उपयोग सेंसर, रोबोटिक्स और स्वचालित उपकरणों से जुड़े प्रोजेक्ट बनाने में किया जाता है। इसमें प्रोग्रामिंग के जरिए सेंसर से मिलने वाले संकेतों के आधार पर अलार्म और अन्य उपकरणों को सक्रिय किया जा सकता है। अक्षित के मॉडल में भी आर्डुइनो का इस्तेमाल सेंसर से जानकारी प्राप्त करने और उसके अनुसार चेतावनी व्यवस्था चलाने के लिए किया गया है। हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है मॉडल हिमाचल प्रदेश के कई पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन से सड़कें बाधित हो जाती हैं। कई बार वाहन चालक और राहगीर इसकी चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में संभावित खतरे की पहले से सूचना देने वाली तकनीक सड़क सुरक्षा के लिए मददगार साबित हो सकती है। अक्षित ठाकुर ने अपने मॉडल के माध्यम से ऐसी व्यवस्था की कल्पना की है, जो खतरे के संकेत मिलने पर लोगों को सतर्क करे और वाहनों की आवाजाही रोकने में मदद दे। यदि इस तरह के मॉडल को आगे तकनीकी परीक्षणों के बाद व्यावहारिक रूप से विकसित किया जाता है, तो यह भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने की दिशा में उपयोगी पहल हो सकती है।

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