ढोल-नगाड़ों की थाप, गूंजती आतिशबाजी और आकर्षक झांकियों के साथ धर्मशाला में विघ्नहर्ता भगवान गणेश को बेहद धूमधाम से भावभीनी विदाई दी गई। गणपति बाप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के गगनभेदी जयकारों के साथ निकली इस भव्य विसर्जन शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। भक्त एक-दूसरे को गुलाल लगाते और भजनों की धुनों पर झूमते हुए अपने आराध्य बप्पा को विदा करने निकले। विसर्जन से पहले एक बेहद अद्भुत और भक्तिमय नजारा देखने को मिला। भगवान गणेश की प्रतिमाओं को सीधे जल में प्रवाहित करने के बजाय, पहले कांगड़ा के प्रसिद्ध श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम ले जाया गया। यहां पूरे विधि-विधान के साथ बप्पा को माता चामुंडा के मुख्य मंदिर में ले जाकर माता के दर्शन करवाए गए और माथा टेकवाया गया। माता के दर्शन के बाद, स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए धाम के समीप बहने वाली पवित्र बाणगंगा नदी में मूर्तियों का विसर्जन किया गया। सुरक्षा और पर्यावरण के कड़े नियमों को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन की मुस्तैदी के बीच यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।