ऐतिहासिक चंबा चौगान में दशहरे के अवसर पर आयोजित छिंज मेले में कुश्ती के दमदार मुकाबलों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी ताकत और दांव-पेच का प्रदर्शन किया। मुकाबलों को देखने के लिए चौगान में लोगों की भीड़ उमड़ी और दशहरे के उत्सव में पारंपरिक खेलों का रंग देखने को मिला। छिंज मेले में पहलवानों के बीच जोरदार मुकाबले हुए। अखाड़े में एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए पहलवानों ने पूरे दमखम के साथ जोर आजमाइश की। उनके दांव-पेच और संघर्ष ने मुकाबलों को रोमांचक बना दिया। दर्शक भी पहलवानों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। रामलीला क्लब के अध्यक्ष स्वप्न महाजन ने बताया कि छिंज मेले का आयोजन हर वर्ष दशहरे के अवसर पर किया जाता है। इसका उद्देश्य चंबा की पारंपरिक संस्कृति और कुश्ती की प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए रखना है। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले पहलवान इस आयोजन में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को पारंपरिक खेलों से जुड़ने का अवसर मिलता है। छिंज मेले में पहलवानों के प्रदर्शन के साथ विजेताओं के लिए रखी गई इनामी राशि भी आकर्षण का केंद्र रही। प्रतियोगिता के तहत चंबा केसरी और चंबा कुमार वर्ग में विजेता और उपविजेता पहलवानों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। - चंबा केसरी: विजेता को 21,000 रुपये और उपविजेता को 14,000 रुपये। - चंबा कुमार: विजेता को 11,000 रुपये और उपविजेता को 8,000 रुपये। छिंज मेले जैसे आयोजन चंबा की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे न केवल कुश्ती की पुरानी परंपरा आगे बढ़ती है, बल्कि युवा पहलवानों को अपनी प्रतिभा दिखाने और पहचान बनाने का अवसर भी मिलता है। दशहरे के उत्सव के साथ पारंपरिक खेलों का यह संगम स्थानीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करता है।