तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2025-26 पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बजट में हिमाचल प्रदेश की उम्मीदों को नजरअंदाज किया गया है, जबकि राज्य सरकार ने बजट पूर्व परामर्श बैठकों में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने केंद्र के समक्ष कई अहम मांगें रखी थीं, जिनमें प्रमुख रूप से प्रदेश में रेलवे परियोजनाओं का 100 प्रतिशत केंद्र सरकार के खर्च पर विकास शामिल था। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में राज्य का 10 प्रतिशत योगदान हटाने का भी अनुरोध किया गया था, ताकि प्रदेश की वित्तीय स्थिति बेहतर हो सके और सड़क नेटवर्क का विस्तार हो सके। बताया कि हिमाचल प्रदेश ने कांगड़ा एयरपोर्ट के विकास के लिए केंद्र से वित्तीय मदद की मांग की थी। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट के विस्तार के लिए केंद्र सरकार को भूमि अधिग्रहण की लागत वहन करनी चाहिए ताकि परियोजना तेजी से पूरी हो सके। आरोप लगाया कि यह बजट विशेष रूप से बिहार चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल चुनावी लाभ के लिए तैयार किया गया है और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों की अनदेखी की गई है। मंत्री ने कहा कि बजट में दूरदराज इलाकों में सेवाओं के वितरण की कठिनाइयों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इन क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए विशेष पैकेज की आवश्यकता थी, लेकिन बजट में इसे पूरी तरह अनदेखा किया गया। धर्माणी ने प्रदेश के सांसदों से अपील की कि वे केंद्रीय बजट पास होने से पहले राज्य के हितों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि हिमाचल के संतुलित विकास के लिए केंद्र सरकार का सहयोग आवश्यक है ताकि राज्य आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सके।