राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के 6 अक्तूबर को बिलासपुर दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था पूरी कर ली है। राष्ट्रपति आनंदपुर साहिब से सड़क मार्ग के जरिए श्री नयना देवी जी पहुंचेंगी और मंदिर में दर्शन करेंगी। इसके बाद वह वापस आनंदपुर साहिब जाएंगी और फिर एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति करीब दो से तीन घंटे रहेंगी। इसके बाद वह शिमला के लिए रवाना होंगी। राष्ट्रपति के श्री नयना देवी जी दौरे को देखते हुए 6 अक्तूबर को सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में दर्शन बंद रहेंगे। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि अगर वे उस दिन दर्शन करना चाहते हैं तो सुबह 7 बजे से पहले मंदिर पहुंचकर दर्शन कर लें। दोपहर 1 बजे के बाद दर्शन सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगे। राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर 500 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और पुलिस जवान तैनात किए जाएंगे। श्री नयना देवी मंदिर और एम्स परिसर की सुरक्षा को तीन-तीन सेक्टरों में बांटा गया है। राष्ट्रपति की अंतरराज्यीय आवाजाही के दौरान पंजाब और हिमाचल पुलिस मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी। राष्ट्रपति पार्किंग स्थल से मंदिर तक करीब 10 से 15 मिनट पैदल चलेंगी। इस रास्ते में करीब 100 से 150 सीढ़ियां हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने सीढ़ियों की सफाई, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया है। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रोटोकॉल के अनुसार यातायात व्यवस्था तैयार की गई है। घागस में सुबह 10 बजे के बाद डायवर्जन की व्यवस्था रहेगी। जबली वाले रूट पर भी सुबह 10 बजे के बाद विशेष यातायात व्यवस्था लागू की जाएगी। हालांकि पूरा रूट एक साथ बंद नहीं किया जाएगा। प्रशासन की ओर से विस्तृत डायवर्जन प्लान साझा किया जाएगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि उस दिन अनावश्यक यात्रा से बचें और जरूरी होने पर ही यात्रा करें। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान श्री नयना देवी मंदिर और एम्स परिसर नो-ड्रोन जोन रहेंगे। इन क्षेत्रों में किसी भी अनधिकृत ड्रोन को उड़ाने की अनुमति नहीं होगी। दोनों परिसरों में धारा 144 लागू रहेगी। हथियार लेकर चलने और पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर भी रोक रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और कंट्रोल रूम से की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसका भी ध्यान रखा गया है। राष्ट्रपति के रूट को अधिकतर एम्स परिसर के भीतर रखने का प्रयास किया गया है। स्कूलों और यातायात पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए भी वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई हैं।