भारत की वामपंथी पार्टियों के आह्वान पर शुक्रवार को बिलासपुर में विभिन्न वामपंथी दलों और संगठनों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा और मामले में उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। वक्ताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों का भी हवाला दिया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर मनमाने ढंग से काम करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसकी निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों की जांच करवाने और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग उठाई। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप कर उचित कदम उठाने का आग्रह किया गया। प्रदर्शन के दौरान कामरेड विजय शर्मा, लखनपाल, पूर्व विधायक केके कौशल, प्रवेश चंदेल, करमचंद, श्यामलाल ठाकुर, वासुदेव, भाग सिंह, कुलवंत पाठक और नीरज बसु सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।