सोनीपत। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार को छोटूराम धर्मशाला में आयोजित हुई किसान महापंचायत में गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोनीपत में नया चीनी मिल लगाने और गन्ने का भाव बढ़ाकर 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई। टिकैत ने कहा कि सोनीपत के चीनी मिल की क्षमता गन्ने के उत्पादन के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में किसानों की बढ़ती गन्ने की आवक को देखते हुए जिले में जल्द नया मिल लगाया जाना चाहिए। किसान महापंचायत में चीनी मिल की प्रबंध निदेशक डॉ. अनमोल पहुंची। इस दौरान किसान नेताओं ने चीनी मिल लगाने की मांग और मुख्यमंत्री से मिलने के लिए मांगपत्र भी सौंपा। राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि चीनी के दाम लंबे समय बाद बढ़े हैं, लेकिन इसका फायदा किसानों को भी मिलना चाहिए। गन्ने की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जहां भी पुराने मिलों की हालत खराब है और क्षमता कम है, वहां नए मिल स्थापित किए जाने चाहिए।किसान नेता ने किसानों से फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खाद के प्रयोग से जमीन की सेहत खराब हो रही है। किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए, ताकि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे और खेती टिकाऊ हो सके। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज सोनीपत से उठी है और इसे पूरे देश में पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। 2027 के यूपी चुनाव पर भी बोले टिकैत उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राकेश टिकैत ने कहा कि किसान उसी राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे, जो किसानों के आंदोलन के दौरान उनके साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि चुनाव जातिवाद या दूसरे मुद्दों के बजाय किसानों के मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी बेईमानी से जीत दर्ज करती है। प्रधानमंत्री के नए वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि विकास और किसान की आय में वृद्धि आखिर कहां हुई। उन्होंने कहा कि खेती घाटे का सौदा नहीं है, बल्कि दिल्ली में जिस कलम से फैसले लिए जाते हैं, उसमें बेईमानी है। हरियाणा के किसान आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले यहां आंदोलन दो-तीन दिन में समाप्त हो जाते थे, लेकिन अब हरियाणा का किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना सीख गया है। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सहरावत, प्रदेश अध्यक्ष रतनमान, जिला अध्यक्ष वीरेंद्र पहल समेत अन्य किसान नेता मौजूद रहे।