नीरज चोपड़ा रविवार को अपने पैतृक गांव खंडरा स्थित संस्कृति स्कूल में एक समारोह में मंच पर आए तो उनका पहला शब्द सबको नमस्ते और राम-राम रहा। उन्होंने कहा कि गांव में आकर उनको बहुत अच्छा लगता है कुछ लोगों का मानना है कि वह अपनी बोली की वजह से सफल नहीं है। उनको अपना डर खत्म करना होगा और अपनी हरियाणवी बोली को कॉन्फिडेंस के साथ बोलना होगा। वह अकेले नहीं बल्कि देश व विदेश में कई ऐसे उदाहरण हैं जो अपनी बोली को आज भी अपनाए हुए हैं।