नारनौल। शहर की गो माता उपचार शाला में लंपी वायरस के 25 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य टीम ने मौके पर पहुंचकर टीकाकरण अभियान शुरू किया। इससे पहले भी उपचार शाला में लंपी के 6 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से एक गोवंश रेवाड़ी के बावल का था। गाय की गंभीर हालत और संक्रमण का खतरा: बहरोड़ रोड पर घूम रही एक काली गाय की हालत लंपी संक्रमण के कारण बेहद चिंताजनक है। गाय के शरीर से लगातार पस (पीप) निकल रही है, जिससे आसपास के अन्य गोवंशों में संक्रमण फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। यदि समय रहते इस गाय का इलाज और टीकाकरण नहीं किया गया, तो क्षेत्र में स्थिति भयावह रूप ले सकती है। उग्र रवैये से टीकाकरण में आ रही बाधा: उपचार शाला की टीम ने दो बार गाय को टीका लगाने का प्रयास किया, लेकिन इंसानों को पास आते देख गाय उग्र हो जाती है। हाल ही में गाय के हमले में टीम का एक कर्मचारी घायल होने से बाल-बाल बचा, हालांकि इस दौरान उसका मोबाइल पूरी तरह टूट गया। सरकारी नियमों के कारण बेहोशी की दवा का अभाव: सरकारी गाइडलाइंस के चलते उपचार शाला की टीम के पास इस समय बेहोशी की दवा उपलब्ध नहीं है। गाय को बिना बेहोश किए काबू कर पाना और टीका लगाना संभव नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों और टीम का मानना है कि नगर परिषद (नप) द्वारा गाय पकड़ने के लिए अधिकृत एजेंसी यदि इस गाय को सुरक्षित रूप से काबू कर ले, तो उसका उपचार संभव हो पाएगा। इससे न केवल पीड़ित गाय की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि अन्य स्वस्थ गोवंशों को भी इस भयानक संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सकेगा।