लंपी त्वचा रोग का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हुडीना गांव में दो बार टीकाकरण होने के बावजूद चार गोवंश दोबारा इस जानलेवा संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। इस घटना के बाद से क्षेत्र के पशुपालकों में भय और निराशा का माहौल है। आंकड़ा 395 पार, उपचार बेअसर होने से ग्रामीण परेशान: जिले में लंपी ग्रस्त गोवंशों की कुल संख्या बढ़कर 525 हो गई थी। राहत की बात यह है कि इनमें से 130 गोवंश स्वस्थ भी हो चुके हैं और अब संक्रमित गोवंशों की संख्या 395 है। इसके अलावा स्थानीय गो माता उपचार शाला की ओर से भी 6 अन्य गोवंशों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि, टीकाकरण के बाद भी बार-बार हो रहे संक्रमण ने पशु पालन विभाग के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संक्रमण से अब तक जिले में 6 गोवंश की मौत भी हो चुकी है। सरकार और प्रशासन से सटीक इलाज की मांग: पशुपालकों का कहना है कि बार-बार टीकाकरण के बावजूद संक्रमण का फैलना चिंताजनक है। ग्रामीणों ने सरकार और पशुपालन विभाग से गुहार लगाई है कि रोग के नए वेरिएंट या कारणों की गहन जांच की जाए और प्रभावी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि लंपी संक्रमण के बढ़ते कहर को रोका जा सके। पशुपालकों का दर्द, इंजेक्शन नहीं कर रहे काम: मेरी गाय 60 प्रतिशत तक ठीक हो गई थी, लेकिन अचानक उसकी हालत फिर खराब हो गई। डॉक्टरों की सलाह पर इंजेक्शन, दवाइयां और अजवाइन-हल्दी की धूनी भी दी, पर कोई फायदा नहीं हुआ। थक-हारकर अब इलाज बंद कर दिया है। सरकार से गुहार है कि इस बीमारी का सटीक इलाज ढूंढ़ा जाए। भूपसिंह पशुपालक, हुडीना 20 दिन पहले मेरी एक गाय संक्रमित हुई थी, जो समय पर इलाज से ठीक हो गई। लेकिन उसके दो दिन बाद ही मेरी दो अन्य गायों और एक बछड़े को संक्रमण हो गया। इन सभी को दो बार टीके लग चुके थे, फिर भी 5 दिन से ये बीमार हैं। विजयपाल पशुपालक, हुडीना ऐसा नहीं है कि टीकाकरण के बाद पशु इसकी चपेट में नहीं आ सकता, लेकिन टीकाकरण के बाद उसकी स्थिति गंभीर नहीं होगी। पशुपालक निश्चिंत रहे टीका पशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कुछ समय लेता है। नसीब सिंह यादव, उप निदेशक, पशु पालन विभाग, नारनौल।