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जींद: जिले में नौ माह में 16,324 लोग हुए एनिमल बाइट के शिकार

जींद। जिले में जानवरों के काटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक जिले में 16324 एनिमल बाइट के मामले स्वास्थ्य विभाग के सामने आ चुके हैं। इनमें कुत्तों के काटने के मामले प्रमुख हैं। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलेभर के स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों को रेबीज के लक्षण, बचाव और समय पर उपचार के महत्व की जानकारी दी गई। जिला नोडल अधिकारी एंटी रेबीज कार्यक्रम डॉ. रवि राणा ने विद्यार्थियों को रेबीज बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संक्रमित जानवर के काटने के बाद लापरवाही जानलेवा हो सकती है। कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने पर बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए और चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। उन्होंने बताया कि जानवर के काटने के तुरंत बाद सबसे पहले घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। इसके बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर उपचार शुरू करवाना चाहिए। घाव पर घरेलू पदार्थ लगाने या उपचार में देरी करने से बचना चाहिए। सभी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है एंटी रेबीज वैक्सीन डॉ. रवि राणा ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी और जिला नागरिक अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जानवर के काटने की स्थिति में वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर चिंता न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान पहुंचें। समय पर उपचार और वैक्सीन से रेबीज के खतरे को रोका जा सकता है।

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