राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में सोमवार को अमर उजाला के 'अपराजिता' कार्यक्रम के तहत छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं को मुश्किल परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने के तरीके सिखाना था, जिसमें दुपट्टे को भी एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तकनीकें शामिल थीं। कोच रोहतास और उनके विद्यार्थी दीपांशु ने 80 से अधिक छात्राओं को विभिन्न परिस्थितियों में हमले से बचने, हमलावर की पकड़ से छूटने और सुरक्षित निकलने की तकनीकें सिखाईं। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को सिखाया गया कि कैसे हाथ, कोहनी और घुटनों का इस्तेमाल करके बचाव किया जा सकता है। कोहनी से नाक और जबड़े पर प्रहार करने, घुटने से पेट पर वार कर दूरी बनाने, और दुपट्टे का उपयोग करके हमलावर का ध्यान भटकाने और उसकी आंखों पर वार कर बच निकलने की तकनीकें बताई गईं। इसके अतिरिक्त, छात्राओं को गर्दन पर हाथ से वार करने, उंगलियों से आंखों पर प्रहार करने, और पैरों का इस्तेमाल कर घुटने पर वार करने जैसी तकनीकों का भी अभ्यास कराया गया, ताकि हमलावर की गति बाधित होने पर वे सुरक्षित निकल सकें। रीढ़ की हड्डी के आसपास दबाव डालने की तकनीक के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बाल खींचने, गला पकड़ने और पीछे से पकड़ लेने जैसी परिस्थितियों से बचाव के तरीके भी विशेष रूप से समझाए गए। छात्राओं को सिखाया गया कि बाल खींचे जाने पर पकड़ की दिशा को समझते हुए खुद को छुड़ाने का प्रयास करना चाहिए। गला पकड़ने की स्थिति में हाथों की पकड़ से निकलने और सांस लेने के लिए जगह बनाने की तकनीक बताई गई। पीछे से पकड़े जाने पर शरीर का संतुलन बनाए रखते हुए पकड़ ढीली करने और बाहर निकलने का अभ्यास कराया गया। जमीन पर गिर जाने की स्थिति में खुद को संभालने, हमलावर से दूरी बनाने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने के तरीके भी बताए गए। छात्राओं को लाठी-डंडा चलाने और तलवार की पकड़ व उससे बचाव की तकनीकों से भी परिचित कराया गया। प्रशिक्षकों ने इस बात पर जोर दिया कि आत्मरक्षा में हर स्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देना महत्वपूर्ण है और शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर सीमित ताकत का इस्तेमाल कर बच निकलने का अवसर बनाया जा सकता है। छात्राओं को संकट के समय जोर से चिल्लाने, आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित करने और मदद मांगने के महत्व के बारे में भी बताया गया। प्राचार्य जगमोहन दुहन ने इस प्रशिक्षण को छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम उनके आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। इस दौरान शिक्षक सुनील भूटानी भी मौजूद रहे।