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कोर्ट के फैसलों पर दोबारा सुनवाई कर अतिथि अध्यापकों को परेशान न करे सरकार: कृष्ण नैन

टोहाना। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से अपनाई जा रही प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया है। संघ ने कहा कि विभाग व्यक्तिगत सुनवाई के नाम पर कोर्ट में पहले ही तय हो चुके मामलों की दोबारा जांच कर रहा है, जो गलत है। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ की कौर कमेटी की ऑनलाइन मीटिंग राज्य प्रधान प्रभु सिंह की अध्यक्षता में हुई। राज्य महासचिव रामपाल ने बताया कि 24 सितंबर को अतिरिक्त मुख्य सचिव व निदेशकों के साथ हुई वार्ता में जो सहमति बनी थी, वर्तमान प्रक्रिया उससे अलग है। संघ जिला स्तर पर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेगा। सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव कृष्ण नैन ने कहा कि 2005-06 में अतिथि अध्यापकों की नियुक्ति विभाग के विज्ञापन, योग्यता और चयन समिति के तहत हुई थी। बाद में 16 व 18 जून 2014 की नीति के तहत नियमितीकरण की नीति बनी। कोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया और पात्रता पर सभी पक्ष रखे जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी दस्तावेज सत्यापन के बाद नियमितीकरण के निर्देश हैं। प्रभु सिंह ने कहा कि विभाग के पास चयन, आरक्षण, मेरिट और नियुक्ति के सारे रिकॉर्ड मौजूद हैं। ऐसे में शिक्षकों से 20 साल पुराने रिकॉर्ड मांगना प्रक्रिया को लंबा करना है। विभाग व्यक्तिगत शैक्षणिक दस्तावेज, अनुभव और सेवा अवधि का सत्यापन करे, पूरी भर्ती प्रक्रिया की दोबारा जांच न करे। संजीव सिंगला ने कहा, प्रशासन का काम कोर्ट के आदेश लागू करना है, कोर्ट की भूमिका में आना नहीं। रामपाल ने बताया कि इस मुद्दे सहित टेट अनिवार्यता और स्कूल मर्जर को लेकर 2 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर अनशन कर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। 10 अक्टूबर तक जिला और 6 नवंबर तक ब्लॉक कन्वेंशन होंगे, फिर आंदोलन तेज किया जाएगा।

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