दीपावली नजदीक आते ही कुम्हार परिवार दीये बनाने में जुट गए हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई और कम आमदनी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुम्हारों के अनुसार, मिट्टी लाने और खुदाई पर पांच से छह हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं, जबकि एक दीया महज तीन रुपये में बिकता है। करीब 38 वर्षों से इस काम में जुटी सोनिया और सुशीला ने सरकार से मिट्टी और भट्टी के लिए जगह उपलब्ध करवाने की मांग की है। कुम्हारों ने बताया कि पहले दीये पकाने में फूस का इस्तेमाल होता था, लेकिन धुआं कम करने के लिए अब नई भट्टी अपनाई है। वहीं, बुजुर्ग महिलाओं मेवा और नारायणी ने कहा कि पहले त्योहारों पर घरों में पकवान बनते थे और लोग मिल-जुलकर खुशियां मनाते थे, लेकिन अब यह परंपरा कम होती जा रही है। उन्होंने लोगों से मिट्टी के दीये खरीदकर कुम्हार परिवारों की आजीविका को सहारा देने की अपील की। संवाद