श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष) के शुरू होते ही बाजारों की रफ्तार धीमी देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां ऑटोमोबाइल, सर्राफा और रियल एस्टेट जैसे भारी-भरकम बजट वाले सेक्टरों में सन्नाटा पसरा है, वहीं दूसरी ओर किराना और धार्मिक कर्मकांड से जुड़े बाजारों में जबरदस्त रौनक है। परंपराओं और आस्था का यह प्रभाव बाजारों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।