बसों के पहिए थमे तो दिल्ली वालों की रफ्तार भी थम गई। मंगलवार सुबह निजी ऑपरेटरों की बसों की हड़ताल के चलते कई रूटों पर यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। बस नहीं मिली तो किसी ने मेट्रो पकड़ी, किसी ने ऑटो-ई-रिक्शा का सहारा लिया। यानी जिस सफर में रोज कुछ रुपये लगते थे, उसी मंजिल तक पहुंचने के लिए मंगलवार को समय के साथ जेब भी ज्यादा ढीली करनी पड़ी। चार बस डिपो की पड़ताल में सामने आया कि हड़ताल का सबसे बड़ा बोझ आम यात्रियों ने उठाया।
-नौकरी के दबाव में इन आउट कर सड़कों पर बस रोककर आराम कर रहे ड्राइवर
-सड़कों पर दिख रही बस लेकिन सवारी इंतज़ार में
-रातों-रात 40 डीटीसी पुलिस कर्मियों का अलग अलग डिपो में तबादला, ताकि साठ-गांठ बनाकर ना कर सके हड़ताल
-बस चालकों की हड़ताल को गुपचुप समर्थन दे रहे कंडक्टर
-कंडक्टर का आरोप- हर साल अनुबंध पर करवातें हैं 8-10 साइन, कभी भी ले सकते हैं नौकरी, कोर्ट जाने की भी इजाज़त नहीं
-कंडक्टर का आरोप- प्रत्येक डिपो पर टाटा के ठेकेदार, मिलने वाली तनख्वाह की आधी तनख्वाह देते हैं ड्राइवर को