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ग्रेटर नोएडा: जीबीयू में बनेगा देश का पहला स्पेस विजन कॉम्प्लेक्स, हाई-टेक यूनिवर्सिटी भी

अनुज कुमार Updated Thu, 27 Aug 2026 01:27 PM IST

गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (जीबीयू) का कैंपस जल्द ही सिर्फ किताबी पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले युवाओं और छात्रों के लिए रोमांचक एडवेंचर व प्रैक्टिकल लर्निंग का केंद्र बनने जा रहा है। शांभला द स्पेस सिटी प्रोजेक्ट के तहत यहां ऐसा स्पेस टूरिज्म और रिसर्च हब तैयार किया जाएगा। जहां आम युवा और छात्र अंतरिक्ष यात्रियों जैसी ट्रेनिंग का खुद अनुभव कर सकेंगे।

जीबीयू में मिशन शक्ति सैट कार्यक्रम को लीड कर रहीं स्पेस किड्ज़ इंडिया की संस्थापक डॉ. श्रीमथी केसन ने बताया कि कुलपति प्रो.राणा प्रताप सिंह के साथ प्लान साझा किया गया है। उन्होंने कुलाधिपति व सीएम योगी को जल्द प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है। इस प्रोजेक्ट में एक हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन जाने के बाद यहां संभावनाएं और भी बढ़ गई है। इसके बन जाने से यूपी पहला राज्य होगा। जहां ऐसी सुविधाएं छात्रों को मिलने लगेगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित स्पेस यूनिवर्सिटी में अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाएं, एडवांस्ड सिमुलेटर, डिजिटल लर्निंग जोन और फ्यूचरिस्टिक लैब्स होंगी, जहां छात्र अंतरिक्ष की गहराइयों, उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष अभियानों का व्यावहारिक प्रशिक्षण ले सकेंगे।

मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों का अनुभव मिलेगा
परियोजना में मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों का अनुभव कराने के लिए एक विशेष सिमुलेशन जोन बनाया जाएगा। यहां छात्र और शोधकर्ता एस्ट्रोनॉट सूट पहनकर मंगल ग्रह की लाल मिट्टी पर जीवन और कृषि की संभावनाओं पर एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे।

वहीं जीरो-ग्रेविटी और माइक्रोग्रेविटी का अनुभव देने के लिए इंडोर स्काईडायविंग फैसिलिटी तैयार की जाएगी, जहां नियंत्रित माहौल में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण की तर्ज पर हवा में तैरने का अनुभव लिया जा सकेगा।

रॉकेट गार्डन स्थापित होगा
विवि में एक विशाल रॉकेट गार्डन स्थापित होगाष जहां भारत व विश्व के ऐतिहासिक रॉकेटों के मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अलावा, आकाशगंगा और खगोलीय घटनाओं के अध्ययन के लिए एक बड़ी ऑब्जर्वेटरी और टेलीस्कोप पार्क भी होगा। शांभला - द स्पेस सिटी में उपग्रहों और अंतरिक्ष उपकरणों के निर्माण के लिए एक समर्पित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पोर्ट और एक बहुस्तरीय स्पेस म्यूजियम व लाइब्रेरी भी शामिल होगी।परिसर में आने वाले छात्रों और आगंतुकों के लिए स्पेस-थीम वाला रेस्टोरेंट और ओपन-एयर एडिटोरियम भी होगा।

देश के भविष्य और युवा वैज्ञानिकों के लिए मील का पत्थर
यह परियोजना केंद्र व राज्य सरकार की शिक्षा और अनुसंधान संबंधी पहलों को मजबूती प्रदान करेगी। अंतरराष्ट्रीय साझेदारों, उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों के सहयोग से बनने वाला यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस देश के उभरते युवा वैज्ञानिकों के सपनों को नई उड़ान देगा। वहीं ग्रेटर नोएडा के शैक्षणिक हब में इस प्रकार के प्रोजेक्ट से न केवल दिल्ली-एनसीआर बल्कि देशभर के स्कूलों और कॉलेजों के स्पेस टूर और एजुकेशनल विजिट्स के लिए यह पहली पसंद बनेगा।

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