धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश और जलाशयों में बढ़ती पानी की आवक को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। गंगरेल जलाशय में जलभराव 96.17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। लगातार हो रही आवक को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंगरेल के दो गेट खोलकर करीब चार हजार क्यूसेक पानी छोड़ा है। महानदी में पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे बसे गांवों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक गंगरेल जलाशय में इस समय करीब 4,342 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। वहीं मुरूमसिल्ली जलाशय 98.49 प्रतिशत भर चुका है और यहां 745 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है। दुधावा जलाशय में 83.56 प्रतिशत जलभराव के साथ 1,178 क्यूसेक तथा सोढ़ुर जलाशय में 69.25 प्रतिशत जलभराव के साथ 167 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है।
गंगरेल से छोड़ा जा रहा पानी रुद्री बैराज पहुंचेगा। यहां से करीब 2,000 क्यूसेक पानी महानदी मुख्य नहर और करीब 2,000 क्यूसेक पानी महानदी में प्रवाहित किया जा रहा है। नदी में पानी बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के गांवों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिलेवासियों से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जलाशयों में पानी की आवक और मौसम को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। महानदी सहित नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोग जलस्तर बढ़ने पर तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर चले जाएं। तेज बहाव वाले पानी, नदी, नाले या जलभराव वाले रास्तों को पार करने का जोखिम न उठाएं।
कलेक्टर ने एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ, नगरीय निकाय और संबंधित विभागों के अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी और स्थानीय सूचना तंत्र के जरिए ग्रामीणों को जलस्तर की जानकारी देने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने कहा गया है।
प्रशासन ने निचले और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, राहत-बचाव दलों की तैयारी और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। ग्राम स्तर पर कोटवार, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय अमले को अलर्ट रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें। बाढ़ या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारी या ग्राम पंचायत को सूचना दें, ताकि समय रहते राहत और बचाव की कार्रवाई की जा सके।